27 Oct 2026, Tue

नेतन्याहू की अग्निपरीक्षा! इजरायल में संसदीय चुनावों के लिए वोटिंग जारी, गठबंधन की संभावनाओं पर टिकी सियासी निगाहें

विश्व समाचार डेस्क

मध्य पूर्व के एक प्रमुख देश में संसदीय चुनाव के लिए मतदान जारी है। इस चुनाव को मौजूदा प्रधानमंत्री के राजनीतिक भविष्य और उनकी सरकार के अस्तित्व के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। देश में सत्तारूढ़ गठबंधन को विपक्षी दलों से कड़ी चुनौती मिल रही है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या मौजूदा नेतृत्व सत्ता बरकरार रखने में सफल होगा या विपक्षी दल मिलकर नई सरकार बनाने का रास्ता निकालेंगे।

चुनाव ऐसे समय हो रहा है, जब देश की सुरक्षा नीति, सैन्य कार्रवाई और घरेलू राजनीतिक फैसलों को लेकर लगातार बहस चल रही है। वर्ष 2023 में हुए बड़े हमले और उसके बाद शुरू हुए युद्धों को लेकर सरकार की रणनीति पर सवाल उठाए जाते रहे हैं। इन घटनाओं ने देश की राजनीति को प्रभावित किया है और मतदाताओं के सामने कई अहम मुद्दे रखे हैं।

विपक्ष ने सत्तारूढ़ गठबंधन को दी चुनौती

चुनाव में विपक्षी नेताओं की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विपक्ष का प्रयास मौजूदा सरकार के खिलाफ अलग-अलग राजनीतिक दलों को एकजुट करके सत्ता परिवर्तन की संभावना मजबूत करना है। दूसरी ओर, सत्तारूढ़ गठबंधन अपने समर्थकों को एकजुट रखने और सरकार बनाने के लिए जरूरी सीटें हासिल करने की कोशिश कर रहा है।

मतदान से पहले सामने आए सर्वेक्षणों में किसी भी राजनीतिक गुट को स्पष्ट बहुमत मिलने के मजबूत संकेत नहीं मिले हैं। इससे चुनाव के बाद सरकार गठन की प्रक्रिया जटिल होने की आशंका बढ़ गई है। यदि कोई भी गठबंधन पर्याप्त सीटें हासिल नहीं कर पाता, तो छोटे राजनीतिक दलों का समर्थन निर्णायक साबित हो सकता है।

120 सदस्यीय संसद के लिए होता है चुनाव

इस देश की संसद में कुल 120 सदस्य होते हैं। चुनाव में आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली अपनाई जाती है, जिसके तहत मतदाता किसी एक उम्मीदवार के बजाय राजनीतिक पार्टी को वोट देते हैं। किसी दल को संसद में प्रवेश पाने के लिए कुल मतों का कम से कम 3.25 प्रतिशत हासिल करना जरूरी होता है।

इस व्यवस्था के कारण चुनाव से पहले राजनीतिक दलों के बीच गठबंधन, समझौते और विलय की अहम भूमिका रहती है। चुनाव में सबसे ज्यादा सीटें जीतने वाली पार्टी को अपने आप सरकार बनाने का अधिकार नहीं मिल जाता। उसे संसद में बहुमत का समर्थन जुटाना होता है।

सरकार बनाने के लिए 61 सांसदों का समर्थन जरूरी

संसद में सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सदस्यों का समर्थन आवश्यक है। चुनाव परिणाम आने के बाद देश के राष्ट्रपति विभिन्न राजनीतिक दलों और नेताओं से विचार-विमर्श करते हैं। इसके बाद सरकार बनाने की जिम्मेदारी किसी सांसद को सौंपी जा सकती है, जिसके पास बहुमत जुटाने की संभावना हो।

यदि किसी दल या गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता, तो छोटे दलों के समर्थन से सरकार बनाने की कोशिश की जाती है। ऐसी स्थिति में गठबंधन की शर्तें, नीतिगत समझौते और सत्ता में हिस्सेदारी जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण हो जाते हैं।

राजनीतिक भविष्य के लिए निर्णायक मुकाबला

देश की संसद का सामान्य कार्यकाल चार साल का होता है। हालांकि, संसद समय से पहले भंग होने, बजट पारित नहीं होने या सरकार गठन में विफलता जैसी परिस्थितियों में निर्धारित समय से पहले भी चुनाव कराए जा सकते हैं।

मौजूदा चुनाव में सुरक्षा, युद्ध के बाद की परिस्थितियां, सरकार की नीतियां और राजनीतिक स्थिरता जैसे मुद्दे चर्चा के केंद्र में हैं। मतदान के बाद आने वाले परिणाम यह तय करेंगे कि मौजूदा नेतृत्व अपनी स्थिति मजबूत कर पाता है या विपक्ष को सरकार बनाने का अवसर मिलता है। फिलहाल सभी की नजरें मतगणना और संभावित गठबंधन के समीकरणों पर टिकी हैं।

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