15 Oct 2026, Thu

दिवाली पर पटाखों को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट का बड़ा निर्देश, पूरे राज्य में सड़कों और सार्वजनिक जगहों पर पटाखे फोड़ने पर रोक

मुंबई: दिवाली और अन्य त्योहारों के दौरान बढ़ते वायु एवं ध्वनि प्रदूषण को देखते हुए महाराष्ट्र में पटाखे फोड़ने को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए हैं। राज्य में सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर पटाखे जलाने पर रोक लगाने का आदेश दिया गया है। इसका उद्देश्य त्योहारों के दौरान लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित करना है। हालांकि, पटाखों के निर्माण और बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया गया है।

सार्वजनिक स्थानों पर पटाखे जलाने पर रोक

अदालत ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि सड़कों और अन्य सार्वजनिक जगहों पर पटाखे फोड़ने से आम लोगों को परेशानी हो सकती है। इससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ने के साथ-साथ वायु और ध्वनि प्रदूषण भी फैलता है। ऐसे में प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि पटाखों का इस्तेमाल निर्धारित और उचित स्थानों पर ही किया जाए।

त्योहारों के दौरान बाजारों, व्यस्त सड़कों और सार्वजनिक स्थलों पर बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही रहती है। ऐसे स्थानों पर पटाखे जलाने से आग लगने, चोट लगने और यातायात बाधित होने जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। नए निर्देशों के तहत प्रशासन को इन परिस्थितियों पर विशेष ध्यान देना होगा।

डीजे, लाउडस्पीकर और लेजर लाइट पर भी सख्ती

सुनवाई के दौरान तेज आवाज वाले डीजे, लाउडस्पीकर और डॉल्बी साउंड सिस्टम के इस्तेमाल को लेकर भी निर्देश दिए गए। इसके अलावा लेजर लाइट के उपयोग पर लागू प्रतिबंधों के पालन पर जोर दिया गया है।

त्योहारों और धार्मिक आयोजनों में तेज आवाज के कारण बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को परेशानी हो सकती है। ध्वनि प्रदूषण का असर आसपास रहने वाले लोगों और पशु-पक्षियों पर भी पड़ता है। इसलिए प्रशासन को नियमों का पालन सुनिश्चित करने और उल्लंघन की स्थिति में आवश्यक कार्रवाई करने के लिए कहा गया है।

अदालत ने संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर नियमावली तैयार करने और उसे सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया है। विस्तृत आदेश सामने आने के बाद नियमों और उनके क्रियान्वयन से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी स्पष्ट हो सकेगी।

पटाखों की बिक्री पर प्रतिबंध क्यों नहीं?

अदालत ने पटाखों के निर्माण और बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के बजाय उनके इस्तेमाल को नियंत्रित करने पर जोर दिया। इसके पीछे पटाखा उद्योग से जुड़े लोगों की आजीविका भी एक महत्वपूर्ण कारण है। इस व्यवसाय से कई परिवारों को रोजगार मिलता है, इसलिए पूरे उद्योग पर रोक लगाने के बजाय सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग सुनिश्चित करने की बात कही गई है।

इसका मतलब है कि पटाखों की बिक्री और निर्माण पर पूर्ण प्रतिबंध की घोषणा नहीं की गई है। हालांकि, पटाखे कहां और किन परिस्थितियों में जलाए जा सकेंगे, इसे लेकर प्रशासनिक नियमों का पालन करना जरूरी होगा।

हरित पटाखों और जागरूकता अभियान पर जोर

अदालत ने पर्यावरण के अनुकूल दिवाली मनाने के लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने का भी निर्देश दिया। इस अभियान में लोगों को हरित पटाखों के इस्तेमाल, प्रदूषण कम करने और सुरक्षित तरीके से त्योहार मनाने के बारे में जागरूक किया जा सकता है। इसके लिए प्रसिद्ध हस्तियों की मदद लेने का सुझाव भी दिया गया है।

भविष्य में भी लागू रहेंगे निर्देश

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इन निर्देशों का पालन केवल इस साल दिवाली तक सीमित नहीं रहना चाहिए। भविष्य में भी नियमों को प्रभावी ढंग से लागू करने की व्यवस्था की जानी चाहिए।

अब प्रशासन की जिम्मेदारी होगी कि वह निर्धारित नियमों के अनुसार कार्रवाई करे और लोगों को निर्देशों की जानकारी दे। त्योहारों के दौरान सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और नागरिकों की सुविधा के बीच संतुलन बनाए रखना इस पूरी व्यवस्था का प्रमुख उद्देश्य रहेगा।

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