भारत में हाई-स्पीड रेल नेटवर्क के विस्तार की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाते हुए केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दिल्ली से सिलीगुड़ी तक बुलेट ट्रेन चलाने की घोषणा की है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के पूरा होने के बाद यात्रियों को राजधानी दिल्ली से पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी तक पहुंचने में केवल 6 घंटे का समय लगेगा। वर्तमान में यह यात्रा ट्रेन से 20 से 24 घंटे तक की होती है।
कोलकाता स्थित राज्य सचिवालय में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान रेल मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में आधुनिक रेल नेटवर्क विकसित किया जा रहा है। इसी योजना के तहत दिल्ली और सिलीगुड़ी को हाई-स्पीड बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के जरिए जोड़ा जाएगा। प्रस्तावित रूट दिल्ली से शुरू होकर लखनऊ, वाराणसी और पटना होते हुए सिलीगुड़ी तक पहुंचेगा।
रेल मंत्री के अनुसार, लगभग 1500 किलोमीटर लंबे इस मार्ग पर बुलेट ट्रेन के संचालन से उत्तर भारत और पूर्वी भारत के बीच कनेक्टिविटी में क्रांतिकारी बदलाव आएगा। इससे न केवल यात्रियों का समय बचेगा, बल्कि व्यापार, पर्यटन और औद्योगिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी। हालांकि अभी परियोजना की लागत, निर्माण समयसीमा और स्टेशनों की संख्या को लेकर विस्तृत जानकारी साझा नहीं की गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत के विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। सिलीगुड़ी को उत्तर-पूर्वी राज्यों का प्रवेश द्वार माना जाता है। ऐसे में दिल्ली से सीधे हाई-स्पीड रेल संपर्क बनने से क्षेत्रीय आर्थिक विकास को बड़ा लाभ मिल सकता है।
इस दौरान रेल मंत्री ने कोलकाता मेट्रो के आधुनिकीकरण को लेकर भी कई अहम घोषणाएं कीं। उन्होंने कहा कि अगले चार से पांच वर्षों में कोलकाता मेट्रो के लिए नई पीढ़ी के 60 अत्याधुनिक रेक शामिल किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि पिछले 11 वर्षों में कोलकाता मेट्रो नेटवर्क में 45 किलोमीटर का विस्तार किया गया है, जबकि इससे पहले चार दशकों में केवल 27 किलोमीटर नई लाइनें जोड़ी गई थीं।
इसके अलावा पश्चिम बंगाल के लिए रेलवे बजट में रिकॉर्ड 14,205 करोड़ रुपये के आवंटन की भी जानकारी दी गई। रेल मंत्री ने कहा कि इस निवेश से राज्य में रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर, यात्री सुविधाओं और माल परिवहन सेवाओं को मजबूत किया जाएगा।
कार्यक्रम में उन्होंने डानकुनी से सूरत तक प्रस्तावित ईस्ट-वेस्ट डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का भी उल्लेख किया। लगभग 2052 किलोमीटर लंबा यह कॉरिडोर देश के पूर्वी और पश्चिमी औद्योगिक क्षेत्रों को जोड़ने का काम करेगा। इससे माल परिवहन की लागत कम होगी और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को नई मजबूती मिलेगी।
दिल्ली-सिलीगुड़ी बुलेट ट्रेन परियोजना को भारत के आधुनिक परिवहन इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण योजनाओं में से एक माना जा रहा है। यदि यह योजना तय समय में पूरी होती है तो देश में हाई-स्पीड रेल नेटवर्क के विस्तार को नई दिशा मिलेगी और करोड़ों यात्रियों को तेज, सुरक्षित और आधुनिक यात्रा का अनुभव प्राप्त होगा।

