तिब्बत में एक बार फिर ताल फटने की घटना से नेपाल सीमा पर खतरा बढ़ गया है। दोबारा पानी का तेज बहाव आने की आशंका को देखते हुए तिब्बत के केरुंग क्षेत्र में चलाया जा रहा बचाव और राहत अभियान अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। प्रशासन ने रेस्क्यू टीमों और स्थानीय लोगों को बेहद सतर्क रहने की सलाह दी है। घटनास्थल के आसपास मौजूद लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने और नदी से कम से कम एक किलोमीटर दूर रहने को कहा गया है।
जानकारी के मुताबिक, तिब्बत-नेपाल सीमा के पास ताल फटने की दूसरी घटना सामने आई है। इसके बाद संभावित खतरे को देखते हुए बचाव अभियान में शामिल टीमों को पीछे हटने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों को आशंका है कि अचानक पानी का बहाव बढ़ने से नदी के आसपास के इलाकों में स्थिति गंभीर हो सकती है।
नदी से दूर रहने की सलाह
स्थिति को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों और बचाव दलों को विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं। नदी के आसपास मौजूद लोगों से तत्काल सुरक्षित स्थानों की ओर जाने की अपील की गई है। स्थानीय स्तर पर लोगों को ऊंचे और सुरक्षित इलाकों में पहुंचने की सलाह दी जा रही है।
नेपाल में भी प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने के लिए कहा है। बचाव एवं राहत कार्य में जुटे सुरक्षाकर्मियों, रेस्क्यू कर्मियों और आम नागरिकों से किसी भी तरह का जोखिम न लेने की अपील की गई है। लोगों को आसपास के अन्य लोगों तक भी खतरे की जानकारी पहुंचाने को कहा गया है, ताकि समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा जा सके।
पहले ताल फटने के बाद आई थी तबाही
तिब्बत में ताल फटने की घटनाओं ने नेपाल में भी चिंता बढ़ा दी है। इससे पहले तिब्बत की ओर से अचानक पानी का तेज बहाव आने के बाद नेपाल के सीमावर्ती इलाकों में भारी तबाही देखने को मिली थी। तेज पानी ने कई क्षेत्रों को प्रभावित किया था और बड़ी संख्या में लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा था।
अब दोबारा ताल फटने की जानकारी सामने आने के बाद प्रशासन किसी भी संभावित खतरे को लेकर पूरी तरह सतर्क है। बचाव कार्य को रोकने का फैसला भी इसी एहतियात के तहत लिया गया है, ताकि रेस्क्यू टीमों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
बर्फ के टुकड़े से बना था अस्थायी बांध
शुरुआती जांच में ऐसी संभावना जताई गई है कि बर्फ का एक बड़ा हिस्सा नदी में गिरने के कारण पानी का बहाव कुछ समय के लिए बाधित हुआ होगा। पानी रुकने से वहां अस्थायी बांध जैसी स्थिति बन सकती है। इसके बाद जमा पानी अचानक बाहर निकलने पर नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है और निचले इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।
फिलहाल प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। लोगों से अपील की गई है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और सुरक्षा संबंधी निर्देशों का पालन करें। जब तक खतरा पूरी तरह टल नहीं जाता, तब तक नदी और निचले इलाकों से दूरी बनाए रखना ही सबसे सुरक्षित कदम माना जा रहा है।

