दुनिया के सात अजूबों में शामिल आगरा स्थित ताज महल अपनी भव्यता और प्रेम की मिसाल के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। मुगल बादशाह शाहजहां ने इसे अपनी पत्नी मुमताज महल की याद में बनवाया था और यह आज भी भारत की सबसे प्रतिष्ठित ऐतिहासिक धरोहरों में से एक माना जाता है।
ताज महल बनाने में कितना खर्च आया?
ऐतिहासिक रिकॉर्ड और आगरा प्रशासन से जुड़ी रिपोर्ट्स के अनुसार ताज महल के निर्माण पर उस समय लगभग 3.2 करोड़ रुपये (32 मिलियन रुपये) खर्च हुए थे। 17वीं शताब्दी में यह राशि बेहद विशाल मानी जाती थी और इसे मुगल साम्राज्य की सबसे महंगी निर्माण परियोजनाओं में से एक कहा जाता है।
कब और कैसे हुआ निर्माण?
ताज महल का निर्माण वर्ष 1632 में शुरू हुआ था। मुख्य मकबरा 1648 तक तैयार हो गया था, जबकि पूरा परिसर 1653 में पूरी तरह बनकर तैयार हुआ। इसका निर्माण करीब 22 वर्षों तक चला और इसमें 20,000 से अधिक कारीगरों, मजदूरों और कलाकारों ने काम किया।
किन-किन चीजों का हुआ इस्तेमाल?
ताज महल के निर्माण में सफेद मकराना संगमरमर, कीमती पत्थर जैसे लाजवर्द, जैस्पर, नीलम, सोना और चांदी का उपयोग किया गया। ये सभी सामग्री भारत और विदेशों के अलग-अलग हिस्सों से लाई गई थी। यमुना नदी के किनारे इसकी मजबूत नींव तैयार करने के लिए विशेष इंजीनियरिंग तकनीक का उपयोग किया गया था।
आज के समय में कितनी होगी लागत?
विशेषज्ञों के अनुमान के अनुसार, यदि आज के समय में ताज महल जैसा निर्माण किया जाए तो इसकी लागत लगभग 7,000 से 8,000 करोड़ रुपये या उससे अधिक हो सकती है। इसकी वजह सामग्री, कारीगरी और निर्माण तकनीक की अत्यधिक लागत है।
ताज महल का महत्व
ताज महल को यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल का दर्जा प्राप्त है और यह हर साल लाखों पर्यटकों को आकर्षित करता है। यह न सिर्फ एक ऐतिहासिक इमारत है, बल्कि भारतीय संस्कृति, कला और मुगल वास्तुकला का अद्भुत उदाहरण भी है।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के अनुसार, ताज महल आज भी देश के सबसे अधिक देखे जाने वाले स्मारकों में शामिल है और इससे भारत को महत्वपूर्ण राजस्व भी प्राप्त होता है।
निष्कर्ष
ताज महल केवल एक इमारत नहीं बल्कि प्रेम, कला और ऐतिहासिक वैभव का प्रतीक है। उस समय की 3.2 करोड़ रुपये की लागत आज भले छोटी लगे, लेकिन अपने समय में यह एक साम्राज्य की वर्षों की आय के बराबर थी।

