8 Aug 2026, Sat

डोनाल्ड ट्रंप के पास 500% टैरिफ लगाने की ताकत, जानें भारत पर 100% टैरिफ लगेगा या नहीं?

वॉशिंगटन। अमेरिकी सीनेट ने रूस से तेल और गैस खरीदने वाले प्रमुख देशों पर कड़ा आर्थिक दबाव बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सीनेट ने ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ नामक विधेयक को भारी बहुमत से मंजूरी दे दी है। यह बिल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से तेल और गैस का सबसे अधिक आयात करने वाले पांच देशों से आने वाले सामान पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार देता है।

सीनेट में इस विधेयक के पक्ष में 86 और विरोध में 11 वोट पड़े। बिल का उद्देश्य रूस के ऊर्जा निर्यात से होने वाली आय को प्रभावित करना और यूक्रेन युद्ध के संदर्भ में उस पर आर्थिक दबाव बढ़ाना बताया गया है।

भारत और चीन भी पांच देशों की सूची में

इस विधेयक के तहत जिन पांच देशों को रूस से तेल और गैस का सबसे बड़ा खरीदार माना गया है, उनमें भारत और चीन भी शामिल हैं। सूची में शामिल देश हैं:

  • चीन
  • भारत
  • अजरबैजान
  • हंगरी
  • स्लोवाकिया

यदि यह कानून लागू होता है और राष्ट्रपति इसके प्रावधानों का उपयोग करते हैं, तो इन देशों से अमेरिका आने वाले कुछ उत्पादों पर 100 प्रतिशत तक आयात शुल्क लगाया जा सकता है।

पहले 500 प्रतिशत टैरिफ का था प्रस्ताव

रूस के ऊर्जा निर्यात को लेकर अमेरिका पहले इससे भी अधिक कठोर रुख अपनाने पर विचार कर रहा था। पिछले वर्ष अप्रैल में सीनेटर लिंडसे ग्राहम और डेमोक्रेटिक सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने एक प्रस्ताव पेश किया था, जिसमें रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की बात कही गई थी।

हालांकि, बाद में इस प्रस्ताव में संशोधन किया गया और टैरिफ की सीमा घटाकर 100 प्रतिशत कर दी गई। साथ ही इसे रूस के पांच सबसे बड़े ऊर्जा आयातक देशों तक सीमित कर दिया गया।

बिल का उद्देश्य क्या है?

अमेरिकी सांसदों का तर्क है कि रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देश अप्रत्यक्ष रूप से रूस की अर्थव्यवस्था को समर्थन दे रहे हैं, जिससे उसे यूक्रेन युद्ध जारी रखने में आर्थिक मदद मिलती है। इसी कारण रूस के प्रमुख ऊर्जा ग्राहकों पर व्यापारिक दबाव बनाने की रणनीति अपनाई जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम केवल रूस के खिलाफ नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा व्यापार और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संबंधों पर भी व्यापक प्रभाव डाल सकता है।

भारत पर क्या पड़ सकता है असर?

भारत ने हाल के वर्षों में रूस से कच्चे तेल के आयात में उल्लेखनीय वृद्धि की है। रियायती दरों पर रूसी तेल खरीदने की नीति के कारण भारत रूस के प्रमुख ऊर्जा खरीदार देशों में शामिल हो गया है।

यदि अमेरिकी प्रशासन इस कानून के तहत टैरिफ लगाने का निर्णय लेता है, तो भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर इसका असर पड़ सकता है। हालांकि, अंतिम निर्णय राष्ट्रपति के अधिकार क्षेत्र में होगा और यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस विधेयक को आगे कानून का रूप मिलता है या नहीं।

फिलहाल यह विधेयक अमेरिकी सीनेट से पारित हो चुका है, लेकिन इसके लागू होने की प्रक्रिया में अभी आगे के संवैधानिक और विधायी चरण भी बाकी हैं।

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