5 Aug 2026, Wed

डायबिटिक फुट के घाव को मामूली ड्रेसिंग समझना पड़ सकता है भारी, एंडोक्राइनोलॉजिस्ट से जानें क्यों जरूरी है समय पर इलाज?

डायबिटीज के मरीजों के लिए पैरों में होने वाला छोटा सा घाव भी गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि पैरों में छाला, जूते की रगड़, त्वचा में दरार या मामूली चोट को सामान्य घाव समझकर नजरअंदाज करना खतरनाक साबित हो सकता है। समय पर जांच और सही इलाज न मिलने पर संक्रमण तेजी से फैल सकता है और गंभीर मामलों में पैर काटने तक की नौबत आ सकती है।

पुणे के इनामदार मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल के एंडोक्रिनोलॉजिस्ट और डायबेटोलॉजिस्ट डॉ. सादिक मुल्ला के अनुसार लंबे समय तक ब्लड शुगर का स्तर बढ़ा रहने से पैरों की नसों को नुकसान पहुंच सकता है। इस स्थिति को डायबिटिक न्यूरोपैथी कहा जाता है। इसमें दर्द, गर्मी, ठंड या चोट का एहसास कम होने लगता है। यही कारण है कि कई बार मरीज को घाव होने के बावजूद ज्यादा दर्द महसूस नहीं होता और वह धीरे-धीरे गंभीर रूप ले लेता है।

डायबिटीज में घाव देर से क्यों भरता है?

डायबिटीज के कारण पैरों में रक्त प्रवाह भी प्रभावित हो सकता है। जब घाव तक पर्याप्त मात्रा में खून नहीं पहुंचता, तो ऑक्सीजन, पोषक तत्व और संक्रमण से लड़ने वाली प्रतिरक्षा कोशिकाएं भी कम पहुंचती हैं। इससे घाव भरने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।

विशेषज्ञ बताते हैं कि केवल रोज ड्रेसिंग करवाना पर्याप्त नहीं होता। घाव के सही इलाज के लिए यह समझना जरूरी है कि संक्रमण कितना फैला है और रक्त प्रवाह की स्थिति कैसी है।

किन जांचों की पड़ सकती है जरूरत?

डॉक्टर घाव की गहराई, आकार और संक्रमण की गंभीरता का आकलन करते हैं। जांच के दौरान यह देखा जाता है कि घाव में मवाद है या नहीं, बदबू आ रही है या नहीं, आसपास सूजन या लालपन है या नहीं, पैर में रक्त प्रवाह कैसा है और नसों की संवेदनशीलता बनी हुई है या नहीं।

यदि संक्रमण गहरा हो जाए, तो यह त्वचा और मांसपेशियों से होते हुए हड्डी तक पहुंच सकता है। ऐसी स्थिति में खून की जांच, एक्स-रे, एमआरआई या घाव से सैंपल लेकर जांच करानी पड़ सकती है।

इलाज में क्या-क्या जरूरी होता है?

डायबिटिक फुट के इलाज में कई कदम एक साथ उठाने पड़ते हैं। सबसे पहले घाव के मृत या संक्रमित हिस्से को हटाया जाता है। इसके बाद घाव पर पड़ने वाले दबाव को कम किया जाता है, ब्लड शुगर को नियंत्रित रखा जाता है और पैर में रक्त प्रवाह बेहतर बनाने की कोशिश की जाती है।

यदि संक्रमण मौजूद हो, तो उसकी गंभीरता के अनुसार एंटीबायोटिक दवाएं दी जाती हैं। जिन मरीजों में पैरों की धमनियों में रुकावट होती है, उन्हें वैस्कुलर सर्जन या रक्तवाहिका विशेषज्ञ की सलाह की जरूरत पड़ सकती है। कुछ मामलों में एंजियोप्लास्टी जैसी प्रक्रिया भी करनी पड़ सकती है।

इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें

विशेषज्ञों के अनुसार यदि घाव के आसपास सूजन बढ़ रही हो, मवाद या बदबू आ रही हो, त्वचा काली पड़ने लगे, बुखार आए, घाव गहरा होता जाए या ब्लड शुगर अचानक बढ़ जाए, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

घरेलू नुस्खों, खुद से दवा लेने या केवल ड्रेसिंग के भरोसे रहने से स्थिति और बिगड़ सकती है। डायबिटीज के मरीजों को रोज अपने पैरों की जांच करनी चाहिए, आरामदायक जूते पहनने चाहिए और किसी भी प्रकार के घाव या छाले को हल्के में नहीं लेना चाहिए। समय पर उपचार से संक्रमण, अस्पताल में भर्ती होने और अंग विच्छेदन जैसी गंभीर जटिलताओं से काफी हद तक बचा जा सकता है।

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