शहबाज शरीफ बोले- अमेरिका–ईरान वार्ता से पश्चिम एशिया में स्थायी शांति की उम्मीद, पाकिस्तान निभा रहा मध्यस्थ की भूमिका
इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच जारी अहम वार्ता के बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि यह बातचीत पश्चिम एशिया में स्थायी शांति स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। साथ ही उन्होंने दोहराया कि पाकिस्तान दोनों देशों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहेगा।
जेडी वेंस के नेतृत्व में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल पहुंचा इस्लामाबाद
इस वार्ता के लिए अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद पहुंचा। इस टीम में विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर भी शामिल हैं।
इस्लामाबाद पहुंचने पर प्रतिनिधिमंडल का स्वागत पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार, सेना प्रमुख फील्ड मार्शल सैयद आसिम मुनीर और गृह मंत्री मोहसिन रजा नकवी ने किया।
शहबाज शरीफ ने जताई शांति की उम्मीद
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के दौरान कहा कि दोनों पक्षों की रचनात्मक भागीदारी क्षेत्रीय स्थिरता के लिए बेहद अहम है। उन्होंने कहा कि यह वार्ता न केवल तनाव कम करने में मदद करेगी, बल्कि लंबे समय तक चलने वाली शांति की नींव भी रख सकती है।
शरीफ ने यह भी स्पष्ट किया कि पाकिस्तान इस प्रक्रिया में मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहेगा और शांति प्रयासों का समर्थन करता रहेगा।
ईरान की भी अहम मौजूदगी
इस बातचीत में ईरान की ओर से भी उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल शामिल है, जिसका नेतृत्व संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागैर गालिबफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची कर रहे हैं। यह वार्ता हाल ही में घोषित युद्धविराम के कुछ ही दिनों बाद हो रही है, जिससे इसकी अहमियत और बढ़ गई है।
क्षेत्रीय हालात अभी भी तनावपूर्ण
हालांकि युद्धविराम की घोषणा के बावजूद क्षेत्रीय स्थिति पूरी तरह स्थिर नहीं है। लेबनान में हालिया इजरायली हमलों में बड़ी संख्या में लोगों की मौत के बाद तनाव फिर से बढ़ गया है। ईरान ने इन हमलों को समझौते का उल्लंघन बताया है, जबकि अमेरिका और इजरायल का कहना है कि लेबनान इस समझौते का हिस्सा नहीं है।
पाकिस्तान की दोहरी भूमिका पर सवाल
इसी बीच पाकिस्तान की भूमिका को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। एक ओर पाकिस्तान अमेरिका–ईरान वार्ता की मेजबानी कर रहा है और शांति प्रयासों में मध्यस्थता की बात कर रहा है, वहीं दूसरी ओर सऊदी अरब में पाकिस्तानी सैनिकों की तैनाती को लेकर भी रणनीतिक सवाल उठ रहे हैं।
सऊदी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, पाकिस्तानी सैन्य बल किंग अब्दुलअजीज एयर बेस पर तैनात किए गए हैं, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करना है।
निष्कर्ष
अमेरिका और ईरान के बीच चल रही यह बातचीत न केवल दोनों देशों के रिश्तों के लिए, बल्कि पूरे पश्चिम एशिया की स्थिरता के लिए अहम मानी जा रही है। पाकिस्तान ने खुद को एक महत्वपूर्ण मध्यस्थ के रूप में पेश किया है, लेकिन आने वाले दिनों में इन वार्ताओं के नतीजे ही तय करेंगे कि क्षेत्र में शांति कितनी मजबूत हो पाती है।

