8 Aug 2026, Sat

जिनेवा के यूएन ऑफिस में भारत के दिए 5 मोर पहुंचे, जानें क्या है इस गिफ्ट को देने का मकसद

जिनेवा: भारत ने संयुक्त राष्ट्र कार्यालय जिनेवा (UN Geneva) को पांच युवा नर मोर उपहार में देकर भारत-यूएन संबंधों को एक नया आयाम दिया है। इन पांच मोरों में चार नीले (ब्लू पीकॉक) और एक दुर्लभ सफेद मोर शामिल है। भारतीय राष्ट्रीय पक्षी के रूप में मोर भारतीय संस्कृति, प्रकृति और विरासत का प्रतीक माना जाता है। इस पहल को भारत और संयुक्त राष्ट्र के बीच लंबे समय से चली आ रही एक विशेष परंपरा को आगे बढ़ाने वाला कदम माना जा रहा है।

संयुक्त राष्ट्र जिनेवा परिसर में इन मोरों के पहुंचने के बाद भारतीय मिशन और यूएन अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। भारत के संयुक्त राष्ट्र मिशन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि यह उपहार भारत और संयुक्त राष्ट्र के बीच साझेदारी की एक नई अभिव्यक्ति है। मिशन ने कहा कि मोर हर भारतीय के दिल में विशेष स्थान रखते हैं और उन्हें संयुक्त राष्ट्र परिसर में देखना दोनों पक्षों के संबंधों को और मजबूत करेगा।

यह परंपरा पहली बार वर्ष 1981 में शुरू हुई थी, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने संयुक्त राष्ट्र जिनेवा को मोरों का एक जोड़ा उपहार में दिया था। तब से समय-समय पर भारत इस परंपरा को आगे बढ़ाता रहा है। नए पांच मोरों के आगमन के साथ यह सांस्कृतिक और प्रतीकात्मक संबंध एक बार फिर चर्चा में आ गया है।

संयुक्त राष्ट्र जिनेवा प्रशासन के अनुसार, इन मोरों को शुरुआत में लगभग तीन महीने तक एक विशेष अस्थायी पक्षीघर (एवियरी) में रखा जाएगा। इस दौरान विशेषज्ञ उनकी स्वास्थ्य जांच, नए वातावरण के अनुकूलन और सुरक्षा संबंधी आवश्यकताओं पर विशेष ध्यान देंगे। इसके बाद उन्हें ‘पैलेस ऑफ नेशंस’ के विस्तृत परिसर में खुले वातावरण में छोड़ दिया जाएगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि सफेद मोर इस उपहार का सबसे आकर्षक हिस्सा है। सफेद मोर सामान्य नीले मोरों की तुलना में काफी दुर्लभ माना जाता है और इसकी उपस्थिति संयुक्त राष्ट्र परिसर में आने वाले पर्यटकों और प्रतिनिधियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बन सकती है।

मोरों की सुरक्षा के लिए भी विशेष व्यवस्था की गई है। संयुक्त राष्ट्र परिसर में वन्यजीव विशेषज्ञ लगातार निगरानी करेंगे, ताकि उन्हें लोमड़ियों और अन्य संभावित खतरों से सुरक्षित रखा जा सके। इसके अलावा उनके भोजन, स्वास्थ्य और प्रजनन संबंधी पहलुओं पर भी नियमित निगरानी रखी जाएगी।

संयुक्त राष्ट्र जिनेवा ने भारत के इस उपहार के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह केवल पक्षियों का उपहार नहीं है, बल्कि सांस्कृतिक विरासत, जैव विविधता और अंतरराष्ट्रीय मित्रता का प्रतीक है। अधिकारियों के अनुसार, मोर परिसर की प्राकृतिक सुंदरता को भी बढ़ाएंगे और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता का संदेश देंगे।

भारत की यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब वैश्विक स्तर पर सांस्कृतिक कूटनीति (Cultural Diplomacy) को देशों के बीच संबंध मजबूत करने का प्रभावी माध्यम माना जा रहा है। मोरों का यह उपहार भी उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में संयुक्त राष्ट्र जिनेवा परिसर में घूमते ये मोर भारत की सांस्कृतिक पहचान और प्रकृति प्रेम के प्रतीक के रूप में देखे जाएंगे। यह उपहार न केवल 1981 में शुरू हुई परंपरा को आगे बढ़ाता है, बल्कि भारत और संयुक्त राष्ट्र के बीच विश्वास, सहयोग और सांस्कृतिक जुड़ाव को भी नई मजबूती प्रदान करता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *