5 Aug 2026, Wed

गुरुग्राम में एक महीने का खर्च ₹43,096? इस लड़की ने गिनाया पाई-पाई का हिसाब, Video हो रहा Viral

गुरुग्राम जैसे महंगे शहर में अकेले रहने का खर्च कितना हो सकता है, इस सवाल पर सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। 21 वर्षीय कंटेंट क्रिएटर चाहत यादव ने जुलाई महीने का अपना पूरा खर्च लोगों के साथ साझा किया है। उन्होंने बताया कि एक महीने में उनका कुल खर्च 43,096 रुपये रहा। वीडियो में उन्होंने किराए से लेकर बिजली, खाने, शॉपिंग और घूमने-फिरने तक हर खर्च का ब्योरा दिया है।

वीडियो के वायरल होने के बाद युवाओं के बीच इस बात पर बहस छिड़ गई है कि क्या महानगरों में अकेले रहने के लिए इतना खर्च सामान्य है या फिर यह आर्थिक दबाव का संकेत है। चाहत यादव ने वीडियो के अंत में लोगों से सवाल भी पूछा कि क्या उन्हें अपने खर्च को लेकर चिंता करनी चाहिए या यह सामान्य बजट माना जा सकता है।

यह वीडियो इंस्टाग्राम पर @chahatsdiary नाम के अकाउंट से शेयर किया गया है। वीडियो में चाहत ने बताया कि उनका सबसे बड़ा खर्च किराया है। वे गुरुग्राम में एक पूरी तरह सुसज्जित 1RK अपार्टमेंट में रहती हैं, जिसके लिए वे हर महीने 15,000 रुपये किराया देती हैं।

उन्होंने बताया कि बिजली का बिल 2,000 रुपये आता है, जबकि जिम और अन्य सदस्यता सेवाओं पर 1,800 रुपये खर्च होते हैं। उनके पास एक स्कूटी भी है, जिस पर ईंधन और मरम्मत के लिए महीने भर में 2,142 रुपये खर्च हुए।

रोजमर्रा के खर्चों की बात करें तो किराने का सामान, ऑनलाइन फूड डिलीवरी और अन्य जरूरी घरेलू जरूरतों पर उनका कुल खर्च 6,879 रुपये रहा। इसके अलावा उन्होंने शॉपिंग पर 12,805 रुपये खर्च किए, जबकि दोस्तों के साथ घूमने-फिरने और मनोरंजन पर 2,470 रुपये खर्च हुए।

इन सभी खर्चों को जोड़ने पर उनका कुल मासिक खर्च 43,096 रुपये रहा। चाहत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस राशि में उनके निवेश शामिल नहीं हैं। यानी बचत और निवेश को अलग रखने के बाद यह उनका वास्तविक मासिक खर्च है।

वीडियो पर सोशल मीडिया यूजर्स ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दी हैं। कुछ लोगों का कहना है कि गुरुग्राम, मुंबई, बेंगलुरु और दिल्ली जैसे शहरों में अकेले रहने वालों के लिए 40 से 50 हजार रुपये का मासिक खर्च असामान्य नहीं है। वहीं कई यूजर्स ने शॉपिंग पर हुए खर्च को अपेक्षाकृत अधिक बताते हुए बजट को संतुलित करने की सलाह दी।

कुछ यूजर्स ने यह भी कहा कि चाहत का खर्च उनके लाइफस्टाइल पर निर्भर करता है और अगर उनकी आय अच्छी है तथा वे निवेश भी कर रही हैं, तो यह बजट पूरी तरह अव्यावहारिक नहीं माना जा सकता। दूसरी ओर, कुछ लोगों ने कहा कि कम उम्र में इतने अधिक मासिक खर्च के बजाय बचत और निवेश पर अधिक ध्यान देना चाहिए।

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी शहर में रहने का खर्च व्यक्ति की आय, जीवनशैली, आवास के प्रकार और व्यक्तिगत प्राथमिकताओं पर निर्भर करता है। महानगरों में किराया, बिजली, परिवहन और भोजन जैसे खर्च तेजी से बढ़े हैं, इसलिए बजट बनाना और खर्चों पर नजर रखना पहले से ज्यादा जरूरी हो गया है।

यह वीडियो केवल एक व्यक्तिगत अनुभव नहीं, बल्कि शहरी जीवन की बढ़ती लागत पर भी चर्चा का विषय बन गया है। खासकर उन युवाओं के लिए जो पढ़ाई, नौकरी या करियर की शुरुआत के लिए बड़े शहरों में अकेले रह रहे हैं, यह बजट एक वास्तविक तस्वीर पेश करता है कि महानगरों में स्वतंत्र जीवन की कीमत कितनी हो सकती है।

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