5 Aug 2026, Wed

गाजा में शांति की ट्रंप की कोशिशों को झटका! नेतन्याहू बोले- हमास के हथियार डाले बिना नहीं हटाएंगे सेना

गाजा युद्ध को समाप्त करने की दिशा में चल रहे अंतरराष्ट्रीय प्रयासों के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ कर दिया है कि इजरायली सेना गाजा में अपनी मौजूदा सैन्य तैनाती से तब तक पीछे नहीं हटेगी, जब तक हमास पूरी तरह हथियार नहीं डाल देता। नेतन्याहू के इस रुख ने अमेरिका की ओर से चलाए जा रहे युद्धविराम और राजनीतिक समाधान के प्रयासों को बड़ा झटका दिया है।

यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप गाजा में स्थायी युद्धविराम और बंधकों की रिहाई को लेकर नई पहल कर रहे हैं। प्रस्तावित समझौते के तहत हमास के हथियार छोड़ने की प्रक्रिया शुरू होनी थी और इसके बदले इजरायल को गाजा के उन इलाकों से चरणबद्ध तरीके से पीछे हटना था, जिन पर वर्तमान में उसका नियंत्रण है। हालांकि नेतन्याहू ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि इजरायल सुरक्षा संबंधी अपनी शर्तों से कोई समझौता नहीं करेगा।

60 प्रतिशत क्षेत्र से पीछे हटने की थी योजना

सूत्रों के अनुसार प्रस्तावित समझौते में इजरायल को गाजा के लगभग 60 प्रतिशत हिस्से से अपनी सेना हटानी थी। यह योजना पहले हुए युद्धविराम समझौते के आधार पर तैयार की गई थी, जिसके तहत बड़े सैन्य अभियानों को रोकने और बंधकों की रिहाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का प्रयास किया गया था। लेकिन इस समझौते के कई अहम बिंदुओं पर दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी।

नेतन्याहू ने कहा कि हमास का पूर्ण निरस्त्रीकरण किसी भी राजनीतिक या सैन्य समझौते की पहली शर्त है। उनके अनुसार यदि हमास हथियारबंद संगठन के रूप में बना रहता है तो गाजा से सेना हटाना इजरायल की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा होगा।

हमास के हथियार छोड़ने पर अड़ा इजरायल

प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने अपने बयान में कहा कि इजरायली सेना अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर आवश्यक कदम उठाएगी। उन्होंने दोहराया कि गाजा से सेना की वापसी तभी संभव होगी जब यह सुनिश्चित हो जाए कि हमास दोबारा सैन्य गतिविधियां शुरू नहीं कर सकता।

इजरायली नेतृत्व का मानना है कि पिछले वर्षों में हमास ने युद्धविराम की अवधि का इस्तेमाल अपनी सैन्य क्षमता बढ़ाने के लिए किया। इसी कारण सरकार इस बार किसी भी समझौते में सुरक्षा गारंटी को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।

अमेरिका और इजरायल के बीच मतभेद

नेतन्याहू के बयान से यह भी संकेत मिला है कि गाजा नीति को लेकर अमेरिका और इजरायल के बीच मतभेद बढ़ रहे हैं। ट्रंप प्रशासन जहां युद्धविराम और राजनीतिक समाधान को आगे बढ़ाना चाहता है, वहीं इजरायल की सरकार हमास के पूर्ण निरस्त्रीकरण से पहले किसी बड़े सैन्य समझौते के पक्ष में नहीं दिख रही है।

विश्लेषकों का मानना है कि नेतन्याहू का यह रुख संभावित युद्धविराम समझौते को और जटिल बना सकता है। यदि हमास और इजरायल दोनों अपनी-अपनी शर्तों पर अड़े रहते हैं, तो गाजा में संघर्ष लंबा खिंच सकता है।

फिलहाल गाजा की स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय युद्धविराम और मानवीय सहायता बढ़ाने की अपील कर रहा है, लेकिन नेतन्याहू के ताजा बयान ने स्पष्ट कर दिया है कि इजरायल अपनी सुरक्षा प्राथमिकताओं को किसी भी समझौते से ऊपर रख रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *