17 Jul 2026, Fri

क्या रूस से तेल खरीदना भारत को पड़ेगा भारी? अमेरिकी सीनेट ने तैयार किया 100% टैरिफ ठोकने का नया प्लान!

वॉशिंगटन: रूस से कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले देशों पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के लिए अमेरिकी सीनेट में नया द्विदलीय प्रतिबंध विधेयक पेश किया गया है। इस प्रस्ताव के अंतर्गत भारत और चीन सहित रूसी ऊर्जा के पांच सबसे बड़े खरीदारों से अमेरिका आने वाले सामान पर अधिकतम 100 प्रतिशत टैरिफ लगाया जा सकता है। हालांकि, भारत पर अभी ऐसा कोई नया शुल्क लागू नहीं हुआ है और विधेयक को कानून बनने से पहले अमेरिकी संसद की निर्धारित प्रक्रिया से गुजरना होगा।

संशोधित विधेयक को ‘Sanctioning Russia Act of 2026’ बताया जा रहा है। इसके पहले वाले संस्करण में रूसी ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव था। अब अधिकतम दर को घटाकर 100 प्रतिशत कर दिया गया है और इसके दायरे को रूसी तेल तथा गैस के पांच सबसे बड़े खरीदारों तक सीमित किया गया है। विधेयक को 60 से अधिक अमेरिकी सीनेटरों का समर्थन प्राप्त होने की खबर है, लेकिन इसे अभी सीनेट में अंतिम मतदान और प्रतिनिधि सभा की मंजूरी मिलना बाकी है।

भारत समेत ये देश आ सकते हैं दायरे में

मौजूदा व्यापारिक आंकड़ों के आधार पर चीन, भारत, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान को रूसी ऊर्जा के प्रमुख खरीदारों में गिना गया है। प्रस्ताव राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को इन देशों से अमेरिका पहुंचने वाले उत्पादों पर अधिकतम 100 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाने का अधिकार दे सकता है। इसका अर्थ यह नहीं है कि विधेयक पारित होते ही सभी देशों पर अपने आप समान दर से टैरिफ लग जाएगा। वास्तविक शुल्क और उसके लागू होने का निर्णय प्रशासन द्वारा विधेयक की शर्तों के आधार पर किया जाएगा।

विधेयक में अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव को हर 180 दिन में रूसी तेल और गैस के प्रमुख खरीदारों की सूची की समीक्षा करने का प्रावधान भी बताया गया है। किसी देश द्वारा रूसी ऊर्जा की खरीद कम करने या बढ़ाने की स्थिति में सूची और संभावित शुल्क में बदलाव किया जा सकता है।

रूस की युद्ध से होने वाली आय घटाना उद्देश्य

अमेरिकी सांसदों का कहना है कि रूसी तेल और गैस की बिक्री से मॉस्को को यूक्रेन के खिलाफ युद्ध जारी रखने के लिए राजस्व मिलता है। प्रस्ताव का उद्देश्य रूस के ऊर्जा कारोबार पर दबाव बढ़ाना और उसके प्रमुख ग्राहकों को वैकल्पिक आपूर्तिकर्ताओं की ओर जाने के लिए मजबूर करना है।

टैरिफ के अतिरिक्त विधेयक में रूस के वरिष्ठ अधिकारियों, वित्तीय संस्थानों, केंद्रीय बैंक, ऊर्जा परियोजनाओं और प्रतिबंधों से बचने में सहायता करने वाले नेटवर्क पर कार्रवाई के प्रावधान शामिल हैं। रूस द्वारा कथित रूप से प्रतिबंधों से बचने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले ‘शैडो फ्लीट’ के जहाज भी इसके निशाने पर हैं।

कुछ देशों को मिल सकती है छूट

प्रस्ताव में उन देशों के लिए सीमित छूट रखी गई है, जिनकी रूसी प्राकृतिक गैस खरीद रूस के कुल गैस निर्यात के 15 प्रतिशत से कम है और जो अपनी निर्भरता कम करने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठा रहे हैं। राष्ट्रपति को अमेरिका के राष्ट्रीय हित या सुरक्षा से संबंधित आधार पर कुछ प्रतिबंधों को स्थगित करने अथवा उनमें छूट देने का अधिकार भी मिल सकता है।

भारत पर क्या होगा संभावित असर?

विधेयक कानून बनने और भारत पर शुल्क लागू होने की स्थिति में अमेरिका में भारतीय वस्तुओं की कीमत बढ़ सकती है। इससे भारतीय निर्यातकों की प्रतिस्पर्धा, नए ऑर्डर और भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता प्रभावित हो सकती है। हालांकि, विधेयक अभी प्रस्ताव के स्तर पर है और इसके अंतिम स्वरूप, मतदान तथा राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद ही वास्तविक प्रभाव स्पष्ट होगा।

 

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