बड़े शहरों में तेजी से बढ़ती ऊंची इमारतें आधुनिक जीवनशैली और सुविधाओं की पहचान बन चुकी हैं। एक ही सोसाइटी में सैकड़ों परिवार रहते हैं, आसपास तमाम सुविधाएं मौजूद होती हैं और हर समय लोगों की आवाजाही भी रहती है। इसके बावजूद कई बार इन इमारतों में रहने वाले लोग खुद को बेहद अकेला महसूस करते हैं। इसी मुद्दे को लेकर एक महिला का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
महिला ने हाई-राइज सोसाइटियों में रहने के अपने अनुभव को साझा करते हुए कहा कि ऊंची इमारतों और बड़ी-बड़ी सोसाइटियों के बीच भी लोगों के बीच जुड़ाव की कमी दिखाई देती है। उन्होंने बालकनी से आसपास मौजूद कई टावरों का नजारा दिखाते हुए अपनी बात रखी, जिसे सोशल मीडिया पर काफी लोगों ने महसूस किए गए अपने अनुभव से जोड़ा।
हाई-राइज इमारतों में अकेलेपन पर कही बात
वायरल वीडियो में महिला ऊंची रिहायशी इमारतों की ओर इशारा करते हुए कहती नजर आ रही हैं कि इन जगहों पर लोगों के बीच काफी अकेलापन और खालीपन है। उनका कहना है कि सोसाइटियों और समुदायों का निर्माण इस उद्देश्य से किया गया था कि लोग एक-दूसरे के करीब रहें और जरूरत के समय उनका साथ मिल सके। लेकिन व्यस्त शहरी जीवन में कई बार लोग एक ही इमारत में रहते हुए भी एक-दूसरे से अनजान बने रहते हैं।
वीडियो में आसपास नजर आ रहे कई टावर आधुनिक शहरों की तस्वीर दिखाते हैं। बड़ी संख्या में फ्लैट और उनमें रहने वाले परिवार होने के बावजूद पड़ोसियों के बीच बातचीत और व्यक्तिगत जुड़ाव सीमित रहने की बात महिला ने उठाई।
सुविधाएं बढ़ीं, लेकिन कम हुआ मेलजोल?
आज की हाई-राइज सोसाइटियों में क्लब हाउस, पार्क, जिम, स्विमिंग पूल और दूसरी सामुदायिक सुविधाएं मौजूद रहती हैं। इनका उद्देश्य लोगों को एक जगह मिलने और सामाजिक जुड़ाव बढ़ाने का अवसर देना भी होता है। हालांकि, काम की व्यस्तता, निजी जिंदगी और डिजिटल दुनिया में बढ़ती निर्भरता के कारण पड़ोसियों के बीच बातचीत कई बार सिर्फ लिफ्ट या कॉरिडोर तक सीमित रह जाती है।
पुराने मोहल्लों में पड़ोसी एक-दूसरे के घर आते-जाते थे और छोटी-बड़ी जरूरतों में मदद करते थे। इसके मुकाबले आधुनिक अपार्टमेंट संस्कृति में प्राइवेसी बढ़ने के साथ लोगों के बीच व्यक्तिगत दूरी भी बढ़ती दिखाई देती है।
सोशल मीडिया यूजर्स ने भी बताई अपनी कहानी
वीडियो वायरल होने के बाद कई लोगों ने महिला की बात से सहमति जताई। कुछ यूजर्स ने बताया कि वे भी बड़ी सोसाइटियों में रहते हुए ऐसी ही स्थिति महसूस करते हैं। लोगों का कहना था कि आसपास बहुत से लोग होने के बावजूद कई बार किसी से दिल की बात करने वाला व्यक्ति नहीं मिलता।
कुछ यूजर्स ने पुराने पड़ोस की संस्कृति को याद करते हुए कहा कि पहले लोग एक-दूसरे के सुख-दुख में शामिल होते थे। वहीं, कुछ लोगों ने सुझाव दिया कि पड़ोसियों से छोटी-छोटी बातचीत शुरू करना और सामुदायिक गतिविधियों में हिस्सा लेना इस दूरी को कम करने का एक तरीका हो सकता है।
महिला का यह वीडियो इसी सवाल को सामने रखता है कि क्या आधुनिक शहरों में ऊंची इमारतों और सुविधाओं के बढ़ने के साथ लोगों के बीच भावनात्मक जुड़ाव कम होता जा रहा है।

