उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के छोटे से कस्बे बुढ़ाना से निकलकर बॉलीवुड में अपनी अलग पहचान बनाने वाले अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी आज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। दमदार अभिनय, अनोखे अंदाज और मेहनत के दम पर उन्होंने हिंदी सिनेमा में वह मुकाम हासिल किया है, जिसके लिए कलाकारों को वर्षों संघर्ष करना पड़ता है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि फिल्मों में आने से पहले नवाजुद्दीन एक पेट्रोकेमिकल कंपनी में केमिस्ट की नौकरी करते थे। आज उनके जन्मदिन के मौके पर उनके संघर्ष और सफलता की कहानी फिर चर्चा में है।
नवाजुद्दीन सिद्दीकी का जन्म एक किसान परिवार में हुआ था। बचपन से ही उन्हें अभिनय का शौक था, लेकिन उस दौर में उनके परिवार में एक्टिंग को करियर के रूप में नहीं देखा जाता था। उन्होंने हरिद्वार की गुरुकुल कांगड़ी यूनिवर्सिटी से साइंस में ग्रेजुएशन किया और इसके बाद नौकरी की तलाश में गुजरात के वडोदरा पहुंचे। वहां उन्होंने एक पेट्रोकेमिकल कंपनी में केमिस्ट के तौर पर काम शुरू किया। नौकरी अच्छी थी और जिंदगी भी स्थिर हो रही थी, लेकिन उनके अंदर का कलाकार उन्हें लगातार बेचैन करता रहा।
कुछ समय बाद उन्होंने नौकरी छोड़ दी और दिल्ली का रुख किया। यहां उनका झुकाव थिएटर की ओर बढ़ा और उन्होंने नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) में दाखिला लिया। हालांकि थिएटर के दिनों में आर्थिक परेशानियां भी खूब झेलनी पड़ीं। हालात इतने कठिन हो गए कि खर्च चलाने के लिए उन्हें चौकीदार की नौकरी तक करनी पड़ी। लेकिन उन्होंने अपने सपने से समझौता नहीं किया और लगातार अभिनय सीखते रहे।
इसके बाद नवाजुद्दीन मुंबई पहुंचे, जहां संघर्ष और भी कठिन हो गया। शुरुआती दिनों में उन्हें फिल्मों में छोटे-मोटे रोल ही मिले। 1999 में रिलीज हुई फिल्म ‘सरफरोश’ में उन्होंने एक छोटा किरदार निभाया। इसके बाद ‘शूल’, ‘मुन्नाभाई एमबीबीएस’ जैसी फिल्मों में भी नजर आए, लेकिन पहचान नहीं मिल सकी। कई साल तक उन्होंने बिना किसी बड़ी सफलता के संघर्ष जारी रखा।
करीब 13 साल के लंबे संघर्ष के बाद साल 2012 में रिलीज हुई गैंग्स ऑफ वासेपुर ने उनकी किस्मत बदल दी। फिल्म में निभाए गए फैजल खान के किरदार ने उन्हें रातोंरात स्टार बना दिया। उनका मशहूर डायलॉग “बाप का, दादा का, भाई का… सबका बदला लेगा तेरा फैजल” आज भी लोगों की जुबान पर है। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।
नवाजुद्दीन ने ‘द लंचबॉक्स’, ‘बजरंगी भाईजान’, ‘मंटो’, ‘रमन राघव 2.0’ और ‘रात अकेली है’ जैसी फिल्मों में शानदार अभिनय किया। वहीं वेब सीरीज सेक्रेड गेम्स में उनके किरदार को भी खूब सराहा गया। अपनी अलग अभिनय शैली और साधारण व्यक्तित्व के बावजूद असाधारण प्रतिभा के कारण उन्होंने खुद को बॉलीवुड के सबसे भरोसेमंद अभिनेताओं में शामिल कर लिया।
आज नवाजुद्दीन सिद्दीकी की कहानी उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो छोटे शहरों से बड़े सपने लेकर निकलते हैं। एक केमिस्ट से बॉलीवुड के बेहतरीन अभिनेता बनने तक का उनका सफर यह साबित करता है कि मेहनत, धैर्य और जुनून के दम पर किसी भी मंजिल को हासिल किया जा सकता है।

