कानपुर: उत्तर प्रदेश के कानपुर नगर निगम मुख्यालय में सोमवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक भाजपा पार्षद ने कथित तौर पर खुद को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की। वार्ड में विकास कार्यों की धीमी रफ्तार और प्रस्तावों से जुड़ी फाइलें लंबित रहने से नाराज पार्षद ने अपनी जेब से उस्तरा निकाल लिया। उन्होंने अपने हाथ की नस काटने का प्रयास किया, लेकिन मौके पर मौजूद अन्य पार्षदों ने समय रहते हस्तक्षेप कर उन्हें रोक लिया। घटना के बाद नगर निगम परिसर में हड़कंप मच गया।
यह मामला नगर निगम प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच विकास कार्यों को लेकर चल रही खींचतान के बीच सामने आया है। पार्षद का आरोप है कि उनके वार्ड में जरूरी काम लंबे समय से अटके हुए हैं और अधिकारियों की ओर से प्रस्तावों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं की जा रही है।
लंबित फाइलों को लेकर अधिकारी से हुई बहस
जानकारी के अनुसार, सोमवार दोपहर करीब तीन बजे वार्ड-37 अशोक नगर के पार्षद पवन गुप्ता मोतीझील स्थित नगर निगम मुख्यालय पहुंचे थे। यहां उन्होंने जोन-1 के अधिशासी अभियंता आलोक श्रीवास्तव से अपने क्षेत्र में प्रस्तावित विकास कार्यों की फाइलों की स्थिति के बारे में जानकारी मांगी।
बातचीत के दौरान लंबित फाइलों को लेकर विवाद बढ़ गया और दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस होने लगी। पार्षद का आरोप था कि विकास कार्यों के प्रस्ताव देने के बावजूद उन्हें आगे नहीं बढ़ाया जा रहा है। इसी नाराजगी के बीच उन्होंने उस्तरा निकालकर खुद को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया।
मौके पर मौजूद पार्षदों और कर्मचारियों ने तुरंत हस्तक्षेप किया और उनके हाथ से उस्तरा छीन लिया। पार्षद विकास जायसवाल और लक्ष्मी कोरी ने भी बीच-बचाव कर उन्हें समझाने का प्रयास किया। समय रहते हस्तक्षेप होने से स्थिति को संभाल लिया गया।
तीन साल से ब्रह्मनगर चौराहे के निर्माण का इंतजार
पवन गुप्ता ने अपने वार्ड में विकास कार्यों की स्थिति पर सवाल उठाते हुए ब्रह्मनगर चौराहे का मुद्दा उठाया। उनका कहना है कि चौराहे के धंसने की घटना को करीब तीन साल बीत चुके हैं, लेकिन निर्माण कार्य अब तक पूरा नहीं हो पाया है। लंबे समय से समस्या बने रहने के कारण स्थानीय लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
पार्षद ने 80 फीट रोड पर नाले से जुड़ी समस्या का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक, करीब चार महीने पहले नाला धंस गया था। नाले का निर्माण तो करा दिया गया, लेकिन सड़क की मरम्मत का काम अब तक पूरा नहीं हुआ है। इससे क्षेत्र के लोगों को आवागमन में दिक्कतें हो रही हैं।
जनता के सवालों से बढ़ रही परेशानी: पार्षद
पार्षद का कहना है कि क्षेत्र में विकास कार्य पूरे नहीं होने के कारण स्थानीय लोग उनसे जवाब मांगते हैं। कई बार लोगों के सवालों और विरोध का सामना भी करना पड़ता है। जनप्रतिनिधि होने के नाते उन्हें जनता की समस्याओं का समाधान कराने की जिम्मेदारी निभानी होती है, लेकिन काम लंबित रहने से उनके सामने मुश्किल स्थिति पैदा हो रही है।
उन्होंने त्योहारों के दौरान भी बुनियादी समस्याओं का समाधान नहीं होने पर नाराजगी जताई। इस घटना ने नगर निगम में विकास कार्यों की प्रगति और अधिकारियों तथा पार्षदों के बीच समन्वय को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
फिलहाल इस मामले में पार्षद की ओर से लगाए गए आरोपों और लंबित परियोजनाओं की स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। घटना ने यह भी रेखांकित किया है कि जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के बीच विवादों का समाधान बातचीत तथा संस्थागत प्रक्रिया के जरिए किया जाना चाहिए, ताकि विकास कार्य प्रभावित न हों और जनता की समस्याओं का समय पर निपटारा हो सके।

