नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई। जुलाई में लगभग 23 प्रतिशत की तेज बढ़त के बाद क्रूड ऑयल 5 प्रतिशत से अधिक टूटकर 80 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गया। इस गिरावट की प्रमुख वजह अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति वार्ता के संकेत तथा अमेरिका द्वारा ईरान के खिलाफ प्रस्तावित सैन्य कार्रवाई को टालने की खबरें मानी जा रही हैं।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य पूर्व में तनाव कम होने की उम्मीद से तेल आपूर्ति को लेकर बनी चिंताएं कुछ हद तक कम हुई हैं, जिससे निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी।
MCX पर 6 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर भी कच्चे तेल में तेज बिकवाली देखने को मिली। सोमवार सुबह लगभग 10:11 बजे 19 अगस्त डिलीवरी वाला कच्चा तेल 6.27 प्रतिशत (509 रुपये) गिरकर 7,604 रुपये प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था।
पिछले कारोबारी सत्र यानी शुक्रवार को यह अनुबंध 8,113 रुपये प्रति बैरल पर बंद हुआ था। सोमवार को इसकी शुरुआत 7,789 रुपये प्रति बैरल पर हुई और शुरुआती कारोबार के दौरान यह 7,588 रुपये प्रति बैरल के इंट्राडे लो तक फिसल गया। वहीं, 7,789 रुपये का स्तर दिन का शुरुआती उच्च स्तर रहा।
जुलाई में आई थी रिकॉर्ड तेजी
कमोडिटी बाजार के जानकारों के अनुसार, जुलाई के दौरान कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 23 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई थी। उस समय अमेरिका-ईरान तनाव, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और लाल सागर में आपूर्ति बाधित होने की आशंकाओं ने तेल की कीमतों को तेजी से ऊपर पहुंचा दिया था।
हालांकि, अब बाजार की धारणा बदलती दिखाई दे रही है। अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की संभावना बढ़ने से यह उम्मीद बनी है कि क्षेत्रीय तनाव में कमी आ सकती है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति पर दबाव कम होगा।
OPEC+ के फैसले का भी असर
केडिया एडवायजरी के अनुसार, OPEC+ के प्रमुख उत्पादक देशों ने उत्पादन कोटा में एक और मामूली बढ़ोतरी को मंजूरी दी है। इससे 2023 में लागू की गई उत्पादन कटौती को धीरे-धीरे वापस लेने की प्रक्रिया लगभग पूरी हो गई है।
यदि मध्य पूर्व में तनाव और कम होता है, तो भविष्य में तेल उत्पादन बढ़ाने की गुंजाइश भी बन सकती है। इससे वैश्विक बाजार में आपूर्ति बढ़ने और कीमतों पर दबाव बने रहने की संभावना है।
ट्रंप के बयान से बाजार में नरमी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कहा कि सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देशों ने अमेरिका से कूटनीतिक समाधान अपनाने की अपील की है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को जल्द से जल्द सामान्य रूप से खोलने के प्रयासों का समर्थन किया जा रहा है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वैश्विक तेल व्यापार का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग माना जाता है। दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है। इसलिए इस क्षेत्र में किसी भी तरह का तनाव तेल की कीमतों पर सीधा असर डालता है।
आगे क्या रहेगा रुख?
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में तेल बाजार की दिशा अमेरिका-ईरान वार्ता, OPEC+ की उत्पादन नीति और मध्य पूर्व की भू-राजनीतिक स्थिति पर निर्भर करेगी। यदि बातचीत आगे बढ़ती है और आपूर्ति संबंधी जोखिम कम होते हैं, तो कच्चे तेल की कीमतों में और नरमी देखने को मिल सकती है।
फिलहाल सोमवार की तेज गिरावट ने जुलाई की मजबूत तेजी पर ब्रेक लगा दिया है और निवेशकों की नजर अब अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम तथा वैश्विक मांग-आपूर्ति के संकेतों पर टिकी हुई है।

