अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर एक बार फिर कड़ा रुख जाहिर किया है। उन्होंने कहा है कि ईरान को किसी भी स्थिति में परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ईरान के साथ चल रहा युद्ध जल्द खत्म हो सकता है और संघर्ष समाप्त होने के बाद तेल की कीमतों में गिरावट आने लगेगी।
एक सभा को संबोधित करते हुए ट्रंप ने ईरान की सैन्य क्षमता पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि ईरान के पास पर्याप्त नौसैनिक और वायु शक्ति नहीं है। उनके मुताबिक, ईरान के पास रडार और एयर डिफेंस जैसी क्षमताएं भी सीमित हैं। ट्रंप ने कहा कि संघर्ष खत्म होने के साथ ही वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दबाव कम होगा और तेल की कीमतें नीचे आ सकती हैं।
ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर सख्त रुख
ट्रंप ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि ईरान के पास कभी भी परमाणु हथियार नहीं होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि इस मुद्दे पर पहले की अमेरिकी सरकारों को कदम उठाना चाहिए था।
ईरान लंबे समय से अपने परमाणु कार्यक्रम को शांतिपूर्ण उद्देश्यों से जुड़ा बताता रहा है, जबकि अमेरिका और उसके सहयोगी देश उसके परमाणु कार्यक्रम को लेकर गंभीर चिंता जताते रहे हैं। इसी मुद्दे को लेकर दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से तनाव बना हुआ है।
पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य तैनाती बढ़ी
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य गतिविधियां बढ़ने की खबरें सामने आ रही हैं। अमेरिकी सेना क्षेत्र में करीब 9 हजार अतिरिक्त सैनिक भेज रही है। इन सैनिकों की तैनाती समुद्री मार्ग से की जा रही है।
जानकारी के अनुसार, इस तैनाती के बाद अक्टूबर के अंत तक पश्चिम एशिया में तीन अमेरिकी विमानवाहक पोत मौजूद हो सकते हैं। क्षेत्र में अतिरिक्त सैन्य संसाधनों की मौजूदगी को ईरान के खिलाफ अमेरिकी रणनीति में महत्वपूर्ण बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।
ट्रंप पहले भी ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को लेकर कड़ा रुख अपना चुके हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा है कि युद्ध जल्द खत्म हो सकता है। ऐसे में एक तरफ अमेरिकी सैन्य तैनाती बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर संघर्ष को जल्द समाप्त करने के उनके बयान से क्षेत्र की स्थिति को लेकर कई सवाल बने हुए हैं।
तेल की कीमतों पर भी नजर
ईरान से जुड़े संघर्ष का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ रहा है। पश्चिम एशिया दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादक क्षेत्रों में शामिल है और यहां लंबे समय तक तनाव रहने से कच्चे तेल की आपूर्ति तथा कीमतों पर असर पड़ सकता है।
ट्रंप ने दावा किया कि युद्ध समाप्त होते ही तेल की कीमतें गिरने लगेंगी। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें केवल युद्ध की स्थिति पर निर्भर नहीं करतीं। उत्पादन, आपूर्ति, मांग और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां भी इसकी कीमत को प्रभावित करती हैं।
इस बीच, ईरान और अमेरिका के बीच तनाव तथा पश्चिम एशिया में बढ़ती सैन्य गतिविधियों पर दुनिया की नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में संघर्ष की दिशा और क्षेत्रीय घटनाक्रम से यह तय होगा कि तनाव कम होता है या स्थिति और जटिल होती है।

