22 Aug 2026, Sat

ईरान अब युद्ध खत्म करना चाहता है, ट्रंप करेंगे भरोसा? शांति समझौते में क्या है अड़चन

नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच एक बार फिर बातचीत और संभावित समझौते को लेकर हलचल तेज हो गई है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने अमेरिका के साथ चल रहे संघर्ष को खत्म करने की अपील की है। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की बातचीत की इच्छा पर सवाल उठाते हुए कहा है कि तेहरान अभी ऐसी ‘सही डील’ के लिए तैयार नहीं है, जो अमेरिका की शर्तों के मुताबिक हो।

पेज़ेश्कियान का यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान और ओमान के अधिकारी अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत दोबारा शुरू कराने की कोशिशों पर चर्चा कर रहे हैं। इससे संकेत मिल रहे हैं कि दोनों देशों के बीच लंबे समय से जारी तनाव को कम करने के लिए कूटनीतिक रास्ते तलाशे जा रहे हैं।

पेज़ेश्कियान बोले- अभी युद्ध खत्म करना बेहतर

ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने शुक्रवार को डॉक्टरों के साथ हुई एक बैठक के दौरान युद्ध खत्म करने की अपील की। उन्होंने कहा कि मौजूदा स्थिति में संघर्ष को समाप्त करना बेहतर होगा क्योंकि ईरान ताकत और सम्मान की स्थिति में है।

पेज़ेश्कियान ने अमेरिका पर गंभीर आरोप भी लगाए। उनका कहना था कि दुनिया ईरान की स्थिति को समझ रही है और अमेरिका पर स्कूलों, अस्पतालों तथा बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने जैसे आरोप लग रहे हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिका की कार्रवाई की दुनिया भर में आलोचना हो रही है।

ईरानी सेना ने दी जवाब देने की चेतावनी

राष्ट्रपति की ओर से युद्ध समाप्त करने की अपील के बावजूद ईरान के सैन्य नेतृत्व ने साफ कर दिया है कि देश किसी भी नई धमकी का जवाब देने के लिए तैयार है।

ईरान के सशस्त्र बलों के चीफ ऑफ स्टाफ मेजर-जनरल अली अब्दुल्लाही के हवाले से कहा गया कि ईरानी सेना जमीन, समुद्र, हवा, वायु रक्षा और साइबर क्षेत्र में पूरी तरह तैयार है। उन्होंने चेतावनी दी कि किसी भी नई धमकी का जवाब कड़ा और प्रभावी तरीके से दिया जाएगा।

इससे स्पष्ट है कि ईरान एक ओर जहां बातचीत का रास्ता खुला रखना चाहता है, वहीं दूसरी ओर अपनी सैन्य तैयारियों को भी कमजोर नहीं करना चाहता।

जून के समझौते का पेज़ेश्कियान ने किया बचाव

पेज़ेश्कियान ने अमेरिका के साथ जून में हुए समझौते का भी बचाव किया है। ईरान के कट्टरपंथी नेताओं की ओर से इस समझौते की आलोचना की गई थी और सरकार पर अमेरिका के सामने झुकने के आरोप लगाए गए।

हालांकि, पेज़ेश्कियान ने इन आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि समझौते में ऐसी कोई शर्त नहीं थी, जिससे यह लगे कि ईरान ने आत्मसमर्पण किया है। उनके मुताबिक, समझौते में किए गए वादे दूसरी पार्टी से जुड़े हुए थे और ईरान को अपनी स्थिति से पीछे हटने की जरूरत नहीं पड़ी।

ट्रंप बोले- ईरान सही डील के लिए तैयार नहीं

वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की बातचीत की इच्छा पर संदेह जताया है। ट्रंप ने कहा कि ईरान समझौता करना चाहता है, लेकिन उनकी राय में वह अभी सही समझौते के लिए तैयार नहीं है।

ट्रंप ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य का भी जिक्र किया और कहा कि इस पूरे क्षेत्र पर अमेरिका का नियंत्रण है। उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका के पास ईरान पर दबाव बनाने के लिए कई विकल्प मौजूद हैं।

क्या बातचीत से खत्म होगा तनाव?

फिलहाल दोनों देशों के बयानों से यह संकेत जरूर मिल रहा है कि कूटनीतिक बातचीत की संभावना पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। ईरान जहां युद्ध खत्म करने की अपील कर रहा है, वहीं अमेरिका समझौते के लिए अपनी शर्तों पर जोर दे रहा है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या दोनों देश किसी ऐसे समझौते तक पहुंच पाएंगे, जिससे सैन्य तनाव कम हो सके। आने वाले दिनों में ईरान और अमेरिका के बीच संभावित बातचीत पर पूरी दुनिया की नजर बनी रहेगी।

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