पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी कड़ी में चीन और पाकिस्तान के बीच उच्चस्तरीय बातचीत हुई है। वांग यी और इशाक डार के बीच फोन पर हुई इस चर्चा में क्षेत्रीय हालात और शांति प्रयासों पर विस्तार से बात की गई।
जानकारी के अनुसार, यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव को लेकर वैश्विक चिंता बढ़ी हुई है। चीन ने इस मुद्दे पर अपनी स्पष्ट राय रखते हुए कहा है कि सबसे बड़ी प्राथमिकता पश्चिम एशिया में किसी भी तरह के संघर्ष को भड़कने से रोकना है। वांग यी ने जोर देकर कहा कि हाल ही में बनी संघर्षविराम की स्थिति को हर हाल में बनाए रखना जरूरी है, क्योंकि यह क्षेत्रीय स्थिरता के लिए बेहद अहम है।
चीनी सरकारी मीडिया के मुताबिक, वांग यी ने पाकिस्तान के शांति प्रयासों की सराहना भी की। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान लगातार संवाद और कूटनीति के जरिए क्षेत्र में स्थिरता लाने की कोशिश कर रहा है, जो सराहनीय है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब हाल ही में इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच अहम वार्ता आयोजित की गई थी।
दूसरी ओर, इशाक डार ने भी बातचीत के दौरान स्पष्ट किया कि पाकिस्तान क्षेत्र में शांति स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि बातचीत और कूटनीति ही किसी भी विवाद का स्थायी समाधान हो सकती है। डार ने यह भी बताया कि इस्लामाबाद में हुई हालिया वार्ता के बाद की परिस्थितियों पर दोनों देशों ने विचार-विमर्श किया और आगे की रणनीति पर चर्चा की।
दोनों नेताओं ने इस दौरान चीन-पाकिस्तान की संयुक्त पांच सूत्रीय शांति पहल पर भी चर्चा की। इस पहल का उद्देश्य पश्चिम एशिया में स्थिरता, संवाद और सहयोग को बढ़ावा देना है। साथ ही दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए कि वे इस मुद्दे पर लगातार संपर्क में रहेंगे और जरूरत पड़ने पर आगे भी समन्वय बनाए रखेंगे।
यह बातचीत उस समय और भी महत्वपूर्ण हो जाती है जब वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट और भू-राजनीतिक तनाव लगातार बढ़ रहे हैं। पश्चिम एशिया में किसी भी बड़े संघर्ष का असर न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। ऐसे में चीन और पाकिस्तान जैसे देशों का कूटनीतिक रूप से सक्रिय होना एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
इससे पहले इशाक डार ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि पाकिस्तान शांति वार्ता की मेजबानी कर गर्व महसूस करता है। उन्होंने अमेरिका और ईरान दोनों का आभार जताते हुए उम्मीद जताई थी कि भविष्य में भी संघर्षविराम और बातचीत की प्रक्रिया जारी रहेगी।
कुल मिलाकर, यह फोन वार्ता दर्शाती है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय पश्चिम एशिया में शांति बनाए रखने के लिए गंभीर है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आने वाले दिनों में कूटनीतिक प्रयास किस दिशा में आगे बढ़ते हैं और क्या क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित हो पाती है या नहीं।

