भारत के स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस Mk1A की भारतीय वायुसेना को होने वाली डिलीवरी फिलहाल प्रभावित हुई है। विमान के परीक्षण के दौरान सामने आई सॉफ्टवेयर से जुड़ी समस्याओं के कारण इसकी आपूर्ति में देरी हो रही है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर रवि कुमार ने बताया कि विमान में जरूरी बदलाव किए जा रहे हैं। कंपनी का कहना है कि समस्याओं को दूर करने के बाद ही डिलीवरी शुरू की जाएगी।
सॉफ्टवेयर में बदलाव की जरूरत
HAL के CMD रवि कुमार के मुताबिक, तेजस Mk1A के परीक्षण के दौरान कई तरह की तकनीकी समस्याएं सामने आती हैं। मौजूदा स्थिति में विमान के सॉफ्टवेयर से जुड़े कुछ बदलाव किए जा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी विमान को वायुसेना को सौंपने से पहले उसका पूरी तरह तैयार और निर्धारित परीक्षणों में खरा उतरना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि कंपनी इन समस्याओं को जल्द दूर करने के लिए काम कर रही है, लेकिन फिलहाल डिलीवरी शुरू होने की कोई निश्चित तारीख बताना संभव नहीं है। उनके मुताबिक विमान में सॉफ्टवेयर की भूमिका काफी महत्वपूर्ण है और इसमें बदलाव की प्रक्रिया को पूरा करना जरूरी है।
डिलीवरी की समयसीमा बताने से इनकार
तेजस Mk1A की डिलीवरी कब से शुरू होगी, इस सवाल पर HAL प्रमुख ने कोई निश्चित समयसीमा देने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि जब तक विमान पूरी तरह तैयार नहीं हो जाता, तब तक डिलीवरी की तारीख तय करना उचित नहीं होगा।
कंपनी का फोकस फिलहाल परीक्षण के दौरान सामने आई समस्याओं को दूर करने और विमान को आवश्यक मानकों के अनुरूप तैयार करने पर है। इसके बाद भारतीय वायुसेना को विमानों की आपूर्ति शुरू की जाएगी।
HTT-40 की डिलीवरी को लेकर भी जानकारी
इस दौरान HAL प्रमुख ने बेसिक ट्रेनर विमान HTT-40 की डिलीवरी को लेकर भी जानकारी दी। भारतीय वायुसेना के लिए ऑर्डर किए गए 70 HTT-40 विमानों की आपूर्ति अगले चार से पांच वर्षों में पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है।
उत्पादन प्रक्रिया को तेज करने और किसी तरह की रुकावट से बचने के लिए HAL निजी क्षेत्र की कंपनियों की भी मदद ले रहा है। गैर-मुख्य निर्माण गतिविधियों को निजी उद्योग के साथ साझा किया जा रहा है। इससे अलग-अलग उत्पादन लाइनों पर काम का दबाव कम करने और उत्पादन क्षमता बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
सप्लाई चेन मजबूत करने पर जोर
HTT-40 के उत्पादन को अलग-अलग डिवीजनों में बांटा गया है। इसके साथ ही घरेलू सप्लायर कंपनियों के साथ सप्लाई चेन को मजबूत करने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य विमानों के निर्माण के दौरान जरूरी कलपुर्जों और अन्य सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करना है, ताकि उत्पादन प्रक्रिया में देरी न हो।
CATS वॉरियर ड्रोन पर भी काम जारी
HAL की ओर से भविष्य की रक्षा तकनीक से जुड़े प्रोजेक्ट्स पर भी काम जारी है। CATS वॉरियर ड्रोन के प्रोटोटाइप पर काम शुरू हो चुका है। कंपनी की योजना अगले साल इसके प्रमाणन की दिशा में आगे बढ़ने की है।
तेजस Mk1A की मौजूदा डिलीवरी में देरी के बीच HAL के लिए सॉफ्टवेयर संबंधी समस्याओं का समाधान प्राथमिकता बना हुआ है। विमान के परीक्षण और जरूरी बदलाव पूरे होने के बाद ही इसकी डिलीवरी की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। फिलहाल कंपनी ने किसी निश्चित तारीख की घोषणा नहीं की है।

