FSSAI की अश्वगंधा सप्लीमेंट्स पर सख्त एडवाइजरी: सिर्फ जड़ के इस्तेमाल के निर्देश, गलत उपयोग पर चेतावनी
नई दिल्ली: आयुर्वेद में सदियों से इस्तेमाल हो रही अश्वगंधा को लेकर अब फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने सख्त रुख अपनाया है। बढ़ते अश्वगंधा सप्लीमेंट्स के बाजार और उनके निर्माण में हो रही अनियमितताओं को देखते हुए एफएसएसएआई ने नई एडवाइजरी जारी की है। इसके तहत अब अश्वगंधा आधारित सप्लीमेंट्स में केवल पौधे की जड़ (Root) के उपयोग को ही मान्यता दी गई है।
गलत इस्तेमाल पर बढ़ी सख्ती
एफएसएसएआई के अनुसार, कुछ कंपनियों द्वारा अश्वगंधा सप्लीमेंट्स में जड़ की जगह पत्तियों (Leaves) का इस्तेमाल किया जा रहा था। जबकि इन दोनों के गुण और प्रभाव पूरी तरह अलग होते हैं। एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि सप्लीमेंट्स में किए जा रहे दावों का आधार अश्वगंधा की जड़ होती है, इसलिए केवल उसी का उपयोग किया जाना चाहिए।
यदि कंपनियां पत्तियों का इस्तेमाल करती हैं, तो इससे न केवल उत्पाद की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है, बल्कि उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य पर भी गलत प्रभाव पड़ सकता है।
अश्वगंधा की जड़ और पत्तियों में अंतर
विशेषज्ञों के अनुसार, अश्वगंधा की जड़ का मुख्य उपयोग तनाव कम करने, नींद सुधारने और शरीर की ताकत बढ़ाने में किया जाता है। यह शरीर में कोर्टिसोल (तनाव हार्मोन) के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करती है।
वहीं दूसरी ओर, अश्वगंधा की पत्तियों का उपयोग मुख्य रूप से घाव भरने और वजन नियंत्रित करने जैसी स्थितियों में किया जाता है। दोनों के गुण अलग-अलग हैं, इसलिए इनका उपयोग भी उद्देश्य के अनुसार किया जाना चाहिए।
बाजार में बढ़ता दुरुपयोग
भारत में अश्वगंधा का उपयोग चाय, जूस, हेल्थ सप्लीमेंट्स और आयुर्वेदिक दवाओं में तेजी से बढ़ा है। यह देश में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों में से एक है।
हालांकि, बाजार में बढ़ती मांग के चलते कुछ कंपनियां मुनाफे के लिए सस्ती पत्तियों का इस्तेमाल कर रही हैं। आंकड़ों के अनुसार, अश्वगंधा की जड़ जहां 300 से 500 रुपये प्रति किलो तक बिकती है, वहीं पत्तियां मात्र 35 से 50 रुपये प्रति किलो में उपलब्ध हैं। इसी अंतर का फायदा उठाकर कुछ निर्माता गुणवत्ता से समझौता कर रहे हैं।
उपभोक्ताओं के लिए चेतावनी
एफएसएसएआई ने उपभोक्ताओं को भी सलाह दी है कि वे अश्वगंधा सप्लीमेंट खरीदते समय उसकी गुणवत्ता और सामग्री की जानकारी जरूर जांचें। गलत उत्पादों के सेवन से अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाता और स्वास्थ्य पर विपरीत असर भी हो सकता है।
निष्कर्ष
एफएसएसएआई की यह एडवाइजरी न केवल उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए अहम कदम है, बल्कि आयुर्वेदिक उत्पादों में पारदर्शिता बनाए रखने की दिशा में भी एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है। आने वाले समय में इस तरह के नियमों से बाजार में शुद्ध और प्रमाणित उत्पादों की उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद है।

