H-1B वीजा पर संभावित रोक: ट्रंप प्रशासन के प्रस्ताव से भारतीयों पर पड़ सकता है बड़ा असर
वाशिंगटन: अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप से जुड़े रिपब्लिकन नेताओं द्वारा लाया गया एक नया विधेयक वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। इस प्रस्ताव के तहत H-1B वीजा को तीन साल तक बंद करने और इसके नियमों को सख्त बनाने की बात कही गई है। यदि यह कानून लागू होता है, तो इसका सबसे बड़ा असर भारतीय पेशेवरों पर पड़ सकता है।
यह विधेयक अमेरिकी कांग्रेस में रिपब्लिकन सांसद एली क्रेन द्वारा “End H-1B Visa Abuse Act of 2026” के नाम से पेश किया गया है। इस बिल को कई अन्य सांसदों का समर्थन भी मिला है। प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य अमेरिकी नागरिकों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाना और विदेशी कामगारों पर निर्भरता कम करना बताया जा रहा है।
रिपब्लिकन नेताओं का आरोप है कि H-1B वीजा सिस्टम का दुरुपयोग हो रहा है और कंपनियां कम लागत पर विदेशी कर्मचारियों को रखकर अमेरिकी कामगारों को नुकसान पहुंचा रही हैं। इसी वजह से वे इस कार्यक्रम में बड़े बदलाव चाहते हैं।
प्रस्तावित विधेयक के तहत H-1B वीजा के वार्षिक कोटा को 65,000 से घटाकर 25,000 करने की बात कही गई है। साथ ही न्यूनतम वेतन को बढ़ाकर 2 लाख डॉलर सालाना करने का प्रस्ताव है। इसके अलावा, वीजा धारकों को अपने परिवार को अमेरिका लाने की अनुमति न देने और एक से अधिक नौकरी करने पर रोक लगाने जैसे सख्त नियम भी शामिल हैं।
विधेयक में यह भी सुझाव दिया गया है कि वीजा चयन प्रक्रिया को लॉटरी सिस्टम के बजाय वेतन-आधारित बनाया जाए। इसके अलावा कंपनियों को यह साबित करना होगा कि उन्हें योग्य अमेरिकी कर्मचारी नहीं मिले हैं और उन्होंने हाल में किसी अमेरिकी कर्मचारी की छंटनी नहीं की है।
गौरतलब है कि H-1B वीजा का सबसे अधिक उपयोग अमेरिकी टेक कंपनियां करती हैं। भारत के हजारों आईटी प्रोफेशनल्स, इंजीनियर और डॉक्टर इसी वीजा के जरिए अमेरिका में काम कर रहे हैं। ऐसे में इस प्रस्ताव का सबसे बड़ा असर भारतीय प्रतिभाओं और उनके करियर पर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह बिल पास हो जाता है, तो अमेरिकी कंपनियों को कुशल विदेशी कर्मचारियों की कमी का सामना करना पड़ सकता है। वहीं भारतीय युवाओं के लिए अमेरिका में नौकरी के अवसर सीमित हो सकते हैं।
हालांकि, यह अभी एक प्रस्तावित विधेयक है और इसे कानून बनने के लिए अमेरिकी संसद की पूरी प्रक्रिया से गुजरना होगा। फिर भी, इसने वैश्विक नौकरी बाजार और खासकर भारतीय पेशेवरों के बीच चिंता बढ़ा दी है।
कुल मिलाकर, H-1B वीजा पर संभावित सख्ती और रोक से अमेरिका की इमिग्रेशन नीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है, जिसका असर सिर्फ अमेरिका ही नहीं बल्कि भारत सहित कई देशों पर पड़ेगा।

