19 May 2026, Tue

अब कहां हैं महाभारत की खूबसूरत उत्तरा, शकुनी मामा ने संवारी थी किस्मत, अब हो गई हैं पहले से भी हसीन

‘महाभारत’ की उत्तरा का सफर: कैसे संयोग ने बनाया वर्षा उसगांवकर को स्टार, आज भी हैं इंडस्ट्री में सक्रिय

नई दिल्ली: बी.आर. चोपड़ा की 1988 में प्रसारित हुई ऐतिहासिक टीवी सीरीज ‘महाभारत’ भारतीय टेलीविजन इतिहास की सबसे प्रतिष्ठित और यादगार प्रस्तुतियों में से एक मानी जाती है। इस शो के हर किरदार ने दर्शकों के दिलों में अपनी खास जगह बनाई, लेकिन ‘उत्तरा’ का किरदार आज भी विशेष रूप से याद किया जाता है। यह भूमिका अभिनेत्री वर्षा उसगांवकर ने निभाई थी, जिनकी एंट्री इस शो में किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं थी।

संयोग से मिला ‘महाभारत’ में मौका

वर्षा उसगांवकर, जो मूल रूप से मराठी और हिंदी सिनेमा की जानी-मानी अभिनेत्री हैं, को ‘महाभारत’ में कोई औपचारिक ऑडिशन देकर नहीं चुना गया था। बताया जाता है कि शो के निर्माता युवा अभिमन्यु और उत्तरा की कहानी के लिए नए चेहरे की तलाश में थे। इसी दौरान प्रसिद्ध अभिनेता गुफी पेंटल, जिन्होंने ‘शकुनी मामा’ का किरदार निभाया था, की नजर वर्षा पर पड़ी, जब वह सेट पर अपने परिवार के साथ शूटिंग देखने पहुंची थीं। इसके बाद उन्हें सीधे ‘उत्तरा’ के रोल के लिए चुन लिया गया।

कथक नृत्य से मिली पहचान

शो में उत्तरा का किरदार एक नृत्यांगना के रूप में दिखाया गया था, जिसमें वर्षा के कथक नृत्य ने दर्शकों को खासा प्रभावित किया। उनके डांस सीक्वेंस को मशहूर कोरियोग्राफर गोपी कृष्णा ने निर्देशित किया था। यह एक ही दृश्य उनके करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ और उन्हें पूरे देश में पहचान मिल गई।

मराठी सिनेमा से बॉलीवुड तक का सफर

वर्षा उसगांवकर ने अपने करियर की शुरुआत मराठी रंगमंच से की थी। उन्हें पहली बड़ी पहचान फिल्म ‘गम्मत जम्मत’ से मिली, जिसे सचिन पिलगांवकर ने निर्देशित किया था। इसके बाद ‘महाभारत’ की सफलता ने उनके लिए हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के दरवाजे खोल दिए।

उन्होंने बॉलीवुड में ‘दूध का कर्ज’, ‘तिरंगा’, ‘हनीमून’, ‘घर आया मेरा परदेसी’ और ‘इंसानियत के देवता’ जैसी फिल्मों में काम किया। वहीं मराठी सिनेमा में ‘लपंडाव’ और ‘भुताचा भाऊ’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को काफी सराहा गया।

क्षेत्रीय और हिंदी सिनेमा में अनुभव

वर्षा उसगांवकर ने कई इंटरव्यू में बताया है कि मराठी और हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में काम करने का अनुभव अलग-अलग रहा है। उनके अनुसार मराठी सिनेमा में कहानी और अभिनय की गहराई पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है, जबकि हिंदी फिल्मों में ग्लैमर और प्रस्तुति का अधिक महत्व होता है।

आज भी एक्टिंग में सक्रिय

वर्षा उसगांवकर आज भी मनोरंजन जगत में सक्रिय हैं। वे मराठी, हिंदी और कोंकणी टेलीविजन और फिल्मों में काम करती रही हैं। टीवी की दुनिया में उन्होंने ‘झांसी की रानी’ और अन्य कई धारावाहिकों में भी अभिनय किया है। हाल के वर्षों में उन्हें मराठी टीवी शो ‘सुख म्हणजे नक्की काय असतं!’ में ‘माई’ की भूमिका में देखा गया था।

मल्टीटैलेंटेड कलाकार

अभिनय के अलावा वर्षा एक प्रशिक्षित गायिका भी हैं और समय-समय पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों से जुड़ी रहती हैं। सोशल मीडिया के जरिए भी वह अपने प्रशंसकों से लगातार जुड़ी रहती हैं।

निष्कर्ष

‘महाभारत’ की उत्तरा का किरदार निभाने वाली वर्षा उसगांवकर का सफर इस बात का उदाहरण है कि कई बार करियर में सफलता योजनाओं से नहीं, बल्कि संयोग और अवसरों से मिलती है। तीन दशकों से अधिक समय बाद भी उनका यह किरदार दर्शकों की यादों में जीवित है और उनकी कला यात्रा आज भी जारी है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *