15 Oct 2026, Thu

अखिलेश यादव का बड़ा आरोप, 19 लाख से ज्यादा पकड़े फर्जी वोटर, BJP हारती है तो चुनाव आयोग के पीछे छिप जाती है

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाते हुए मतदाता सूची में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की है। उन्होंने दावा किया कि नए मतदाताओं के पंजीकरण से जुड़े आंकड़ों में अंतर है और बड़ी संख्या में ऐसे मतदाताओं का विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है, जिनके नाम सूची में शामिल किए जाने की प्रक्रिया चली।

16 लाख से अधिक आवेदनों का विवरण सार्वजनिक नहीं होने का दावा

अखिलेश यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अक्टूबर 2025 से अप्रैल 2026 के बीच नए मतदाताओं के पंजीकरण से जुड़े आंकड़ों का हवाला दिया। उनके मुताबिक, इस अवधि में फॉर्म-6 के माध्यम से नए मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए कुल 87 लाख 56 हजार आवेदन भरे गए। उन्होंने दावा किया कि इनमें से लगभग 84 लाख 30 हजार नए मतदाताओं के नाम अंतिम मतदाता सूची में शामिल किए गए।

सपा अध्यक्ष के अनुसार, इन आवेदनों में से केवल 71 लाख 38 हजार के विवरण सार्वजनिक किए गए। उन्होंने सवाल उठाया कि शेष 16 लाख 18 हजार आवेदनों से संबंधित जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की गई। उनका कहना है कि मतदाता सूची से जुड़े आंकड़ों में स्पष्टता होनी चाहिए, ताकि किसी भी तरह के संदेह की गुंजाइश न रहे।

19 लाख 20 हजार संदिग्ध मतदाताओं की पहचान का दावा

अखिलेश यादव ने कहा कि उनकी पार्टी के कार्यकर्ता, जिन्हें ‘PDA प्रहरी’ कहा जाता है, मतदाता सूची की जांच कर रहे हैं। उनके दावे के मुताबिक, इन कार्यकर्ताओं ने अब तक लगभग 19 लाख 20 हजार कथित फर्जी या संदिग्ध मतदाताओं से जुड़े मामले सामने रखे हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ मतदाताओं के नाम, उम्र और रिश्तेदारों से जुड़ी जानकारियों में समानता दिखाई दी है। इसी आधार पर उन्होंने मतदाता सूची की जांच और संबंधित विवरणों की सार्वजनिक उपलब्धता की मांग की। हालांकि, इन आंकड़ों और कथित गड़बड़ियों की स्वतंत्र पुष्टि सामने दी गई जानकारी में नहीं हुई है। इसलिए इन दावों को आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

बीजेपी और चुनाव आयोग पर लगाए आरोप

सपा अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि जिन विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा को चुनावी नुकसान होने की संभावना होती है, वहां मतदाता सूची में गड़बड़ी की आशंका अधिक रहती है। उन्होंने भाजपा और चुनाव आयोग के बीच मिलीभगत का आरोप भी लगाया। हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में कोई स्वतंत्र रूप से सत्यापित प्रमाण उपलब्ध नहीं कराया गया है।

अखिलेश यादव ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया में मतदाता सूची की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में नए मतदाताओं के नाम जोड़ने और आवेदन स्वीकार करने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए। उन्होंने आयोग से सभी संबंधित आंकड़ों का स्पष्ट विवरण सार्वजनिक करने की मांग की।

मतदाता सूची की पारदर्शिता पर बढ़ी बहस

मतदाता सूची में नए नाम जोड़ने की प्रक्रिया और संदिग्ध प्रविष्टियों को लेकर उठे सवालों ने राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है। विपक्षी दलों की ओर से पारदर्शिता की मांग के बीच यह भी महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित आंकड़ों की आधिकारिक स्तर पर क्या स्थिति स्पष्ट की जाती है।

फिलहाल, इस मामले में लगाए गए आरोपों और दावों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। मतदाता सूची की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए आंकड़ों का स्पष्ट विवरण, शिकायतों की निष्पक्ष जांच और संबंधित पक्षों की आधिकारिक प्रतिक्रिया अहम भूमिका निभा सकती है।

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