1 Apr 2026, Wed

होर्मुज स्ट्रेट को खोलने की तैयारी! ईरान के खिलाफ US के साथ जंग के मैदान में उतरेगा UAE

होर्मुज स्ट्रेट संकट के बीच UAE का बड़ा कदम, अमेरिका के साथ कार्रवाई की तैयारी

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच United Arab Emirates (UAE) अब ईरान के खिलाफ चल रही जंग में सक्रिय भूमिका निभाने की तैयारी कर रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, UAE होर्मुज स्ट्रेट में बाधित नौवहन को बहाल करने के लिए United States और उसके सहयोगियों के साथ मिलकर कार्रवाई कर सकता है। यह कदम क्षेत्रीय राजनीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी प्रकार का व्यवधान पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करता है। मौजूदा स्थिति में ईरान पर आरोप है कि वह इस जलमार्ग में बाधा डालकर वैश्विक ऊर्जा सप्लाई को प्रभावित कर रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, UAE संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक प्रस्ताव के लिए लॉबिंग कर रहा है, जिससे होर्मुज स्ट्रेट को खोलने के लिए अंतरराष्ट्रीय सैन्य कार्रवाई को मंजूरी मिल सके। इसके साथ ही UAE ने अमेरिका, यूरोप और एशिया के कई देशों से मिलकर एक संयुक्त सैन्य गठबंधन बनाने की अपील भी की है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर UAE इस कदम को आगे बढ़ाता है, तो वह फारस की खाड़ी का पहला ऐसा देश बन जाएगा जो ईरान के खिलाफ सीधे सैन्य कार्रवाई में शामिल होगा। इससे क्षेत्र में संघर्ष और भी तेज हो सकता है।

इस बीच Donald Trump ने भी सहयोगी देशों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट को सुरक्षित रखना केवल अमेरिका की जिम्मेदारी नहीं है। ट्रंप ने स्पष्ट कहा कि जो देश इस मार्ग पर निर्भर हैं, उन्हें खुद आगे आकर इसकी सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए। उनका यह बयान अमेरिका की बदलती रणनीति की ओर इशारा करता है।

होर्मुज स्ट्रेट भौगोलिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील क्षेत्र है। यह Iran और Oman के बीच स्थित है और फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। इसका सबसे संकरा हिस्सा मात्र 33 से 35 किलोमीटर चौड़ा है, जबकि जहाजों के आवागमन के लिए उपलब्ध रास्ता केवल लगभग 2 मील चौड़ा है।

इस मार्ग से Saudi Arabia, Iraq, Kuwait, Qatar और UAE जैसे देशों का कच्चा तेल दुनिया भर में सप्लाई होता है। ऐसे में यहां किसी भी प्रकार की रुकावट वैश्विक ऊर्जा संकट को जन्म दे सकती है।

विश्लेषकों के अनुसार, अगर होर्मुज स्ट्रेट को लेकर सैन्य टकराव बढ़ता है, तो इसका असर केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर देखने को मिलेगा। तेल की कीमतों में तेजी, आपूर्ति में बाधा और आर्थिक अस्थिरता जैसे प्रभाव सामने आ सकते हैं।

फिलहाल, दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या कूटनीतिक प्रयासों से इस संकट का समाधान निकलेगा या फिर यह संघर्ष और बड़ा रूप लेगा। UAE का संभावित कदम इस पूरे घटनाक्रम को एक नए मोड़ पर ला सकता है।

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