आज के समय में अपना घर खरीदना लगभग हर व्यक्ति का सपना होता है। हालांकि, बढ़ती प्रॉपर्टी कीमतों के कारण अधिकांश लोग इस सपने को पूरा करने के लिए होम लोन का सहारा लेते हैं। बैंक और वित्तीय संस्थान आय के आधार पर ग्राहकों को बड़े-बड़े होम लोन ऑफर करते हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि केवल लोन पात्रता के आधार पर फैसला लेना सही नहीं होता। घर खरीदने से पहले यह समझना बेहद जरूरी है कि हर महीने चुकाई जाने वाली ईएमआई (EMI) आपकी आय और भविष्य की वित्तीय योजनाओं को किस हद तक प्रभावित करेगी।
वित्तीय सलाहकारों के अनुसार, होम लोन एक लंबी अवधि की वित्तीय जिम्मेदारी होती है। आमतौर पर लोग 15 से 30 वर्षों तक की अवधि के लिए होम लोन लेते हैं। ऐसे में हर महीने सैलरी का एक बड़ा हिस्सा ईएमआई के रूप में खर्च होता है। यदि लोन राशि जरूरत से अधिक हो और ईएमआई आय का बड़ा हिस्सा लेने लगे, तो इससे परिवार की आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ सकता है।
फाइनेंशियल एक्सपर्ट और मोटिवेशनल स्पीकर अंकुर वारिकू का मानना है कि किसी भी व्यक्ति की होम लोन ईएमआई उसकी मासिक आय के 30 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए। उदाहरण के तौर पर यदि किसी व्यक्ति की मासिक आय 1 लाख रुपये है, तो उसकी होम लोन ईएमआई लगभग 30,000 रुपये तक सीमित रहनी चाहिए। इससे व्यक्ति अपनी अन्य वित्तीय जरूरतों को भी आसानी से पूरा कर सकता है और भविष्य के लिए बचत करने में सक्षम रहता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि घर की ईएमआई के अलावा परिवार पर कई अन्य महत्वपूर्ण खर्च भी होते हैं। इनमें बच्चों की स्कूल फीस, स्वास्थ्य बीमा, मेडिकल खर्च, वाहन ऋण, घरेलू जरूरतें, निवेश और आपातकालीन बचत शामिल हैं। यदि किसी व्यक्ति की अधिकांश आय केवल होम लोन की किस्त चुकाने में खर्च हो जाती है, तो इन आवश्यक खर्चों को पूरा करना कठिन हो सकता है। यही वजह है कि लोन लेते समय संतुलित वित्तीय योजना बनाना जरूरी माना जाता है।
आर्थिक विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि बड़ा और महंगा घर खरीदने की चाहत में अपनी वित्तीय क्षमता से अधिक कर्ज नहीं लेना चाहिए। खासकर उन परिवारों को, जिनके बच्चे हैं, उन्हें शिक्षा और भविष्य की जरूरतों को प्राथमिकता देनी चाहिए। आज उच्च शिक्षा की लागत लगातार बढ़ रही है और आने वाले वर्षों में यह खर्च और अधिक बढ़ सकता है। ऐसे में केवल बड़ा घर खरीदने के लिए वित्तीय जोखिम उठाना समझदारी नहीं माना जाता।
होम लोन लेने से पहले व्यक्ति को अपनी कुल आय, मासिक खर्च, बचत, निवेश और भविष्य की जिम्मेदारियों का विस्तृत आकलन करना चाहिए। साथ ही एक आपातकालीन फंड भी बनाए रखना चाहिए, ताकि नौकरी या आय में किसी प्रकार की अनिश्चितता आने पर आर्थिक संकट का सामना न करना पड़े।
विशेषज्ञों का मानना है कि बैंक आपको कितना लोन देने को तैयार है, यह सबसे महत्वपूर्ण बात नहीं है। असली सवाल यह है कि आप हर महीने कितनी ईएमआई बिना किसी आर्थिक तनाव के चुका सकते हैं। सही वित्तीय योजना और जिम्मेदार निर्णय ही आपके घर के सपने को सुरक्षित और सफल बना सकते हैं।

