10 Apr 2026, Fri

‘हमारे खिलाफ ऐसा कैसे बोल दिया’, इजराइल ने पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ को खूब सुनाई खरी खोटी

इज़रायल ने पाकिस्तान के रक्षा मंत्री के बयान पर जताई कड़ी आपत्ति, मध्यस्थता भूमिका पर उठे सवाल

हाल ही में पाकिस्तान, अमेरिका और ईरान के बीच संभावित युद्धविराम और शांति वार्ता को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। इसी बीच पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के एक बयान को लेकर नया कूटनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। इज़रायल ने इस बयान की कड़ी आलोचना करते हुए पाकिस्तान की मध्यस्थता भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच लगभग दो सप्ताह के अस्थायी युद्धविराम की मध्यस्थता में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। साथ ही यह भी बताया जा रहा है कि पाकिस्तान 11 अप्रैल को शांति वार्ता की मेजबानी करने की तैयारी में है। हालांकि, इसी कूटनीतिक प्रयास के बीच एक विवादित बयान ने स्थिति को तनावपूर्ण बना दिया है।

इज़रायल प्रधानमंत्री कार्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व ट्विटर) पर बयान जारी करते हुए पाकिस्तान के रक्षा मंत्री की टिप्पणी को “बेहद आपत्तिजनक” बताया। इज़रायली प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा कि जिस सरकार पर शांति की मध्यस्थता की जिम्मेदारी है, उसी के एक वरिष्ठ मंत्री द्वारा इस तरह की टिप्पणी करना स्वीकार्य नहीं है।

विवाद तब शुरू हुआ जब ख्वाजा आसिफ ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में इज़रायल की कड़ी आलोचना की। उन्होंने इज़रायल को “मानवता के लिए अभिशाप” बताते हुए यह दावा किया कि इज़रायल की नीतियों के कारण गाजा, ईरान और लेबनान में नागरिकों की मौतें हो रही हैं। उनके बयान में यह भी कहा गया कि जिन लोगों ने फिलिस्तीनी भूमि पर इज़रायल की स्थापना की, उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने चाहिए।

इस बयान के बाद इज़रायल की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आई। इज़रायली प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा कि यह टिप्पणी न केवल भड़काऊ है, बल्कि इसमें यहूदी विरोधी भावनाएं भी झलकती हैं। इज़रायल ने सवाल उठाया कि जब पाकिस्तान खुद को एक “निष्पक्ष मध्यस्थ” के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, तो उसके मंत्री द्वारा इस तरह की भाषा कैसे स्वीकार्य हो सकती है।

इज़रायल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने भी इस बयान की निंदा की। उन्होंने कहा कि शांति वार्ता की मेजबानी करने वाले देश के एक वरिष्ठ मंत्री द्वारा इस तरह की भाषा अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के सिद्धांतों के खिलाफ है। उनके अनुसार, यह बयान शांति प्रयासों को कमजोर कर सकता है और क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा सकता है।

इस घटनाक्रम के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में पाकिस्तान की मध्यस्थता भूमिका पर बहस तेज हो गई है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे बयान कूटनीतिक प्रयासों को नुकसान पहुंचा सकते हैं, जबकि अन्य का कहना है कि क्षेत्रीय संघर्षों पर देशों की अलग-अलग राजनीतिक राय स्वाभाविक है।

फिलहाल पाकिस्तान की ओर से इस विवाद पर आधिकारिक स्पष्टीकरण की प्रतीक्षा की जा रही है। वहीं, इज़रायल ने स्पष्ट किया है कि वह ऐसे बयानों को गंभीरता से लेता है और शांति प्रक्रिया में पारदर्शिता एवं निष्पक्षता की उम्मीद रखता है।

यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब पश्चिम एशिया में तनाव पहले से ही उच्च स्तर पर है और किसी भी कूटनीतिक बयान का प्रभाव क्षेत्रीय स्थिरता पर पड़ सकता है।

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