सोशल मीडिया पर इन दिनों एक महिला उद्यमी की स्टार्टअप जर्नी चर्चा में है। उन्होंने करीब 75 लाख रुपये सालाना की नौकरी छोड़कर अपना कारोबार शुरू करने का फैसला किया था। शुरुआत में उन्हें अपने प्रोडक्ट से काफी उम्मीदें थीं, लेकिन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के तेजी से बदलते दौर ने उनकी पूरी रणनीति को चुनौती दे दी। स्थिति यहां तक पहुंच गई कि उनका पहला प्रोडक्ट महज 30 दिनों में बाजार के लिए लगभग अप्रासंगिक हो गया और कंपनी ने अपने सभी ग्राहक खो दिए।
75 लाख की नौकरी छोड़कर शुरू किया कारोबार
पुणे की टेक एंटरप्रेन्योर ख्याति ठाकुर ने अपनी स्टार्टअप जर्नी सोशल मीडिया पर साझा की है। कंप्यूटर साइंस में मास्टर डिग्री हासिल करने के बाद उन्होंने कई वर्षों तक सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर काम किया। करीब तीन साल तक एक टेक कंपनी में सीनियर सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में काम करने के बाद उन्होंने फरवरी 2025 में नौकरी छोड़ दी और अपना स्टार्टअप शुरू करने का फैसला किया।
उनकी सालाना सैलरी करीब 75 लाख रुपये थी। इतनी अच्छी नौकरी छोड़कर उन्होंने अपना पूरा ध्यान बिजनेस और नए प्रोडक्ट को विकसित करने में लगा दिया। शुरुआत में उन्हें उम्मीद थी कि उनका आइडिया छोटे कारोबारियों की बड़ी समस्या को हल कर सकेगा।
छोटे कारोबारियों के लिए बनाया था AI प्रोडक्ट
उनका स्टार्टअप छोटे व्यवसायों को ऑनलाइन कारोबार शुरू करने और उसे आगे बढ़ाने में मदद करने के उद्देश्य से बनाया गया था। इसके जरिए ऑनलाइन स्टोर तैयार करने, प्रोडक्ट कैटलॉग बनाने, मार्केटिंग कंटेंट तैयार करने और अलग-अलग ऑनलाइन मार्केटप्लेस पर सामान बेचने में सहायता देने की कोशिश की गई।
शुरुआत में कंपनी का पहला प्रोडक्ट अच्छा प्रदर्शन कर रहा था और कुछ ग्राहक भी उससे जुड़ चुके थे। लेकिन इसी दौरान AI की दुनिया में तेजी से बदलाव आया। नए AI टूल्स के आने और लगातार बेहतर होने से उनके प्रोडक्ट की उपयोगिता तेजी से कम होने लगी।
30 दिन में गंवा दिए सभी ग्राहक
ख्याति के मुताबिक, AI के तेजी से विकास का असर उनके कारोबार पर इतना ज्यादा पड़ा कि महज 30 दिनों के भीतर उन्होंने अपने सभी ग्राहक खो दिए। जिस प्रोडक्ट को तैयार करने में समय, पैसा और मेहनत लगी थी, वह अचानक बाजार की नई जरूरतों के सामने कमजोर पड़ गया।
यह अनुभव बताता है कि टेक्नोलॉजी आधारित कारोबार में बाजार कितनी तेजी से बदल सकता है। खासतौर पर AI के क्षेत्र में नए टूल्स और फीचर्स लगातार सामने आने के कारण किसी प्रोडक्ट की मांग बहुत कम समय में बदल सकती है।
16 महीने तक चलता रहा संघर्ष
इस झटके के बाद ख्याति और उनकी टीम ने हार मानने के बजाय कंपनी की दिशा बदलने का फैसला किया। नए बिजनेस मॉडल और उपयोगी प्रोडक्ट की तलाश में उन्हें करीब सात महीने लगे। इसके बाद एक ऐसा प्रोडक्ट तैयार करने में लगभग नौ महीने और लगे, जिसे वे ग्राहकों के लिए ज्यादा उपयोगी मानती हैं।
इस तरह करीब 16 महीने तक संघर्ष करने के बाद टीम ने अपने स्टार्टअप को नई दिशा देने की कोशिश की। उनकी कहानी दिखाती है कि स्टार्टअप की सफलता सिर्फ अच्छे आइडिया पर निर्भर नहीं करती, बल्कि बदलती तकनीक और बाजार के अनुसार खुद को तेजी से ढालना भी उतना ही जरूरी है।
असफलता से मिली बड़ी सीख
इस पूरी यात्रा को साझा करते हुए ख्याति ने बताया कि एक मजबूत नौकरी छोड़कर उद्यमिता की राह चुनना आसान नहीं था। लेकिन इससे भी बड़ी चुनौती तब आई, जब तकनीक में अचानक हुए बदलाव ने उनके शुरुआती प्रोडक्ट को प्रभावित कर दिया। उनकी कहानी उन लोगों के लिए एक सीख है जो स्टार्टअप शुरू करने का सपना देखते हैं कि बिजनेस में जोखिम हमेशा मौजूद रहता है और असफलता के बाद दोबारा शुरुआत करने की क्षमता बेहद महत्वपूर्ण होती है।

