सोने-चांदी में गिरावट: सुरक्षित निवेश की चमक फीकी, वैश्विक दबाव से कीमतें टूटीं
अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाजार में सोमवार को सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिली। आमतौर पर संकट के समय सुरक्षित निवेश माने जाने वाला सोना इस बार निवेशकों को अपेक्षित सहारा नहीं दे पा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अन्य बाजारों में नुकसान की भरपाई के लिए निवेशक सोने की बिकवाली कर रहे हैं, जिससे इसकी कीमतों पर दबाव बना हुआ है।
घरेलू वायदा बाजार में मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सुबह के कारोबार में सोने की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। 5 जून डिलीवरी वाला सोना 0.26% टूटकर 1,49,294 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। वहीं चांदी की कीमत भी कमजोर रही और 5 मई 2026 डिलीवरी कॉन्ट्रैक्ट 0.54% गिरकर 2,31,250 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज किया गया।
अगर हाजिर बाजार की बात करें तो देश के प्रमुख शहरों में सोने की कीमतों में हल्का अंतर देखा गया। राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट सोना 14,928 रुपये प्रति ग्राम पर रहा, जबकि मुंबई, कोलकाता और बेंगलुरु में यह लगभग 14,913 रुपये प्रति ग्राम के आसपास रहा। चेन्नई में सोने की कीमत सबसे अधिक रही, जहां 24 कैरेट सोना 15,066 रुपये प्रति ग्राम दर्ज किया गया।
वैश्विक बाजार में भी सोने की कीमतों में कमजोरी जारी रही। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना करीब 4,600 डॉलर प्रति औंस के स्तर तक गिर गया है। यह गिरावट लगातार दूसरे सत्र में देखी गई है, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई है।
विश्लेषकों के अनुसार, इस गिरावट के पीछे कई वैश्विक कारण जिम्मेदार हैं। खासतौर पर डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को लेकर दिए गए अल्टीमेटम ने बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा नहीं खोला गया, तो ईरान के महत्वपूर्ण ढांचों पर हमले किए जा सकते हैं।
इस तरह के भू-राजनीतिक तनाव आमतौर पर सोने की कीमतों को सहारा देते हैं, लेकिन इस बार तस्वीर थोड़ी अलग है। ऊर्जा कीमतों में तेजी और बढ़ती महंगाई की आशंकाओं ने केंद्रीय बैंकों को ब्याज दरें बढ़ाने की ओर प्रेरित किया है। इससे सोने जैसे गैर-ब्याज देने वाले निवेश विकल्पों की मांग कमजोर पड़ रही है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, हाल के समय में सोना करीब 12% तक गिर चुका है। इसके पीछे एक बड़ी वजह यह भी है कि निवेशक अपने पोर्टफोलियो में संतुलन बनाए रखने के लिए सोने में होल्डिंग कम कर रहे हैं और अन्य एसेट क्लास में हुए नुकसान की भरपाई कर रहे हैं।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में सोने और चांदी की कीमतें वैश्विक आर्थिक संकेतकों, ब्याज दरों के रुख और भू-राजनीतिक हालात पर निर्भर करेंगी। अगर महंगाई और ब्याज दरों में बढ़ोतरी जारी रहती है, तो कीमती धातुओं पर दबाव बना रह सकता है।
कुल मिलाकर, फिलहाल सोना अपने पारंपरिक “सेफ-हेवन” रोल में कमजोर नजर आ रहा है और निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।

