सुप्रीम कोर्ट में बड़ा बदलाव: वर्चुअल सुनवाई, हाइब्रिड सिस्टम और जजों की कार पूलिंग लागू
सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने अपने कामकाज के तरीके में बड़ा बदलाव करते हुए नया सर्कुलर जारी किया है। इस नई व्यवस्था के तहत अब कोर्ट की सुनवाई और प्रशासनिक कार्यों में डिजिटल और पर्यावरण-हितैषी उपायों को बढ़ावा दिया जाएगा।
यह बदलाव प्रधानमंत्री की अपील के बाद सामने आया है और इसे केंद्र सरकार के निर्देशों के बाद तुरंत प्रभाव से लागू किया गया है।
सोमवार और शुक्रवार को पूरी तरह वर्चुअल सुनवाई
नए आदेश के अनुसार अब सोमवार, शुक्रवार और “मिसलेनियस डे” माने जाने वाले दिनों में मामलों की सुनवाई केवल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए होगी। इन दिनों अदालत में शारीरिक उपस्थिति सीमित रहेगी और अधिकतर काम ऑनलाइन मोड में किया जाएगा।
इसके अलावा आंशिक कार्य दिवसों में भी सुनवाई वर्चुअल ही होगी। कोर्ट प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के लिंक समय पर उपलब्ध कराए जाएं और तकनीकी व्यवस्था मजबूत रखी जाए ताकि किसी तरह की दिक्कत न हो।
हाइब्रिड सिस्टम भी लागू रहेगा
सप्ताह के बाकी तीन दिनों में हाइब्रिड सुनवाई जारी रहेगी, जिसमें वकील और पक्षकार चाहें तो कोर्ट में उपस्थित हो सकते हैं या ऑनलाइन माध्यम से भी जुड़ सकते हैं। इस व्यवस्था का उद्देश्य अदालत के कामकाज को अधिक लचीला और प्रभावी बनाना है।
जजों की कार पूलिंग से ईंधन बचाने की पहल
नए सर्कुलर में एक अहम पर्यावरणीय कदम भी शामिल किया गया है। इसके तहत सुप्रीम कोर्ट के जज अब ईंधन की बचत के लिए कार पूलिंग करेंगे। यानी आवश्यकता पड़ने पर जज एक ही वाहन में यात्रा करेंगे।
यह पहल न सिर्फ ईंधन की बचत को बढ़ावा देगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम व्यवस्था
सर्कुलर में कोर्ट कर्मचारियों को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। सुप्रीम कोर्ट की विभिन्न शाखाओं और सेक्शन में लगभग 50% कर्मचारियों को सप्ताह में दो दिन घर से काम करने की अनुमति दी गई है।
हालांकि, कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम के दौरान फोन पर उपलब्ध रहना अनिवार्य होगा और जरूरत पड़ने पर तुरंत कार्यालय बुलाया जा सकता है।
प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन विभागों में ऑन-साइट उपस्थिति जरूरी है, वहां वर्क फ्रॉम होम की अनुमति सीमित या समाप्त की जा सकती है।
डिजिटल और पारदर्शी न्याय प्रणाली की ओर कदम
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यह फैसला न्यायिक प्रणाली को अधिक डिजिटल, तेज और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे कोर्ट के कामकाज में आधुनिक तकनीक का उपयोग बढ़ेगा और समय की बचत भी होगी।
यह सर्कुलर सुप्रीम कोर्ट के सेक्रेटरी जनरल भारत पराशर की ओर से जारी किया गया है और इसे न्यायिक प्रशासन में एक महत्वपूर्ण सुधार माना जा रहा है।

