केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई बैठक के बाद कहा कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत सकारात्मक और सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई। उन्होंने बताया कि प्रदर्शनकारियों की ओर से पहली बार सरकार के साथ औपचारिक बातचीत का प्रस्ताव आया, जिसके बाद सुबह 11:50 बजे से चर्चा शुरू हुई। बैठक के दौरान पहले मौखिक रूप से विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से बातचीत हुई और बाद में शाम करीब 4 बजे प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों से जुड़ी लिखित याचिका सरकार को सौंपी।
जेपी नड्डा ने बैठक के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि सरकार प्रदर्शनकारियों की बात सुनने और समाधान निकालने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने लिखा कि बातचीत सकारात्मक माहौल में हुई और प्रतिनिधिमंडल ने अपनी मांगों को विस्तार से रखा। सरकार ने उनकी बातों को गंभीरता से सुना और आगे आवश्यक प्रक्रिया अपनाने का भरोसा दिया।
नड्डा ने सभी प्रदर्शनकारियों से अपील की कि वे अपना धरना समाप्त करें और क्षेत्र में सामान्य स्थिति बहाल करने में प्रशासन का सहयोग करें। उन्होंने कहा कि संवाद के जरिए किसी भी समस्या का समाधान निकाला जा सकता है और सरकार हमेशा लोकतांत्रिक तरीके से बातचीत के पक्ष में रही है। उनके अनुसार, शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखना सभी पक्षों की जिम्मेदारी है।
दूसरी ओर, प्रदर्शनकारी संगठन सीजेपी ने भी सरकार के सामने अपनी तीन प्रमुख शर्तें रखी हैं। संगठन का कहना है कि जब तक इन मांगों पर स्पष्ट आश्वासन और ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन समाप्त करने पर अंतिम फैसला नहीं लिया जाएगा। हालांकि, बैठक के बाद दोनों पक्षों के बीच संवाद की शुरुआत को सकारात्मक कदम माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, बैठक में प्रदर्शनकारियों ने अपनी समस्याओं और मांगों को विस्तार से रखा, जबकि सरकार की ओर से समाधान के लिए बातचीत जारी रखने का भरोसा दिया गया। फिलहाल सरकार और प्रदर्शनकारी संगठन के बीच आगे भी चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह बैठक गतिरोध खत्म करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकती है। यदि दोनों पक्ष आपसी सहमति से समाधान तक पहुंचते हैं, तो लंबे समय से जारी आंदोलन समाप्त हो सकता है और सामान्य स्थिति बहाल होने की उम्मीद बढ़ेगी।
फिलहाल सभी की नजरें सरकार और प्रदर्शनकारी संगठन के अगले कदम पर टिकी हैं। यह देखना अहम होगा कि सीजेपी की तीनों शर्तों पर सरकार क्या रुख अपनाती है और क्या बातचीत के जरिए आंदोलन का शांतिपूर्ण समाधान निकल पाता है।

