जिबूती के राष्ट्रपति इस्माइल उमर गुलेह लगातार छठी बार चुने गए, 98% वोटों से दर्ज की बड़ी जीत
अफ्रीकी देश जिबूती में हुए राष्ट्रपति चुनाव में मौजूदा राष्ट्रपति इस्माइल उमर गुलेह ने एक बार फिर बड़ी जीत दर्ज की है। आधिकारिक नतीजों के मुताबिक, 78 वर्षीय गुलेह को लगभग 97.81 प्रतिशत वोट हासिल हुए हैं, जिसके बाद वे लगातार छठी बार देश के राष्ट्रपति चुन लिए गए हैं।
इस चुनाव में गुलेह के सामने केवल एक ही प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार थे, जिससे मुकाबला बेहद सीमित माना जा रहा था। चुनाव आयोग के अनुसार मतदान शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ और देश में किसी बड़े विवाद या हिंसा की सूचना नहीं मिली।
दो दशक से अधिक समय से सत्ता में हैं गुलेह
इस्माइल उमर गुलेह वर्ष 1999 से जिबूती की सत्ता संभाल रहे हैं। उन्होंने अपने चाचा और पूर्व राष्ट्रपति हसन गौलेद अप्तिदोन के बाद देश की कमान संभाली थी। तब से अब तक वे लगातार सत्ता में बने हुए हैं और देश की राजनीति में उनका मजबूत प्रभाव माना जाता है।
हाल ही में देश की संसद ने राष्ट्रपति पद के लिए उम्र सीमा को समाप्त कर दिया था, जिससे उनके लंबे कार्यकाल को और अधिक मजबूती मिली।
विपक्ष की सीमित भागीदारी
इस चुनाव में वास्तविक प्रतिस्पर्धा न के बराबर देखी गई। विपक्षी दलों ने लंबे समय से चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं और राजनीतिक स्वतंत्रता पर प्रतिबंधों का आरोप लगाया है। कई बार विपक्ष चुनावों का बहिष्कार भी करता रहा है।
गुलेह के खिलाफ चुनाव लड़ने वाले एकमात्र उम्मीदवार मोहम्मद फराह समातर थे, जो पहले सत्ताधारी दल के सदस्य रह चुके हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस चुनाव में वास्तविक मुकाबला बहुत कमजोर था।
रणनीतिक रूप से अहम देश
जिबूती अफ्रीका के हॉर्न क्षेत्र में स्थित एक छोटा लेकिन रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण देश है। यहां अमेरिका, चीन, फ्रांस और जापान जैसे कई देशों के सैन्य अड्डे मौजूद हैं। इसके अलावा यह देश रेड सी और एडेन की खाड़ी को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्ग पर स्थित है।
देश की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से विदेशी सैन्य अड्डों से मिलने वाली आय और पड़ोसी देश इथियोपिया को बंदरगाह सेवाएं प्रदान करने पर निर्भर करती है।
निष्कर्ष
लगातार छठी बार राष्ट्रपति चुने जाने के बाद इस्माइल उमर गुलेह की सत्ता पर पकड़ और मजबूत हो गई है। हालांकि विपक्ष और राजनीतिक स्वतंत्रता को लेकर सवाल अब भी बने हुए हैं, लेकिन फिलहाल जिबूती की कमान एक बार फिर उन्हीं के हाथों में है।

