24 Feb 2026, Tue

सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम के लिए सरकार का बड़ा फैसला, शुरू होगा एचपीवी टीकाकरण

Cervical Cancer Prevention: 14 साल की लड़कियों के लिए मुफ्त HPV टीकाकरण शुरू करेगी सरकार

देश में सर्वाइकल कैंसर के बढ़ते मामले गंभीर चिंता का विषय बनते जा रहे हैं। यह महिलाओं में कैंसर से होने वाली मौतों का विश्व स्तर पर चौथा सबसे बड़ा कारण माना जाता है। समय पर पहचान और रोकथाम के जरिए इस जानलेवा बीमारी को काफी हद तक रोका जा सकता है। इसी दिशा में भारत सरकार ने एक बड़ा कदम उठाने का फैसला किया है।

14 साल की लड़कियों के लिए फ्री HPV वैक्सीनेशन

रिपोर्ट्स के मुताबिक, केंद्र सरकार 14 साल की लड़कियों के लिए मुफ्त एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमावायरस) टीकाकरण कार्यक्रम शुरू करने जा रही है। इस राष्ट्रीय अभियान का मुख्य उद्देश्य सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम को मजबूत करना है।

विशेषज्ञों के अनुसार, एचपीवी संक्रमण सर्वाइकल कैंसर का प्रमुख कारण है। यदि किशोरावस्था में ही टीकाकरण कर दिया जाए तो भविष्य में संक्रमण और कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। सरकार का मानना है कि समय रहते टीका लगने से लाखों महिलाओं की जान बचाई जा सकती है।

डब्ल्यूएचओ की वैश्विक रणनीति का हिस्सा

World Health Organization इसे कैंसर उन्मूलन की अपनी वैश्विक रणनीति का अहम हिस्सा मानता है। डब्ल्यूएचओ का लक्ष्य है कि अधिक से अधिक देशों में किशोरियों को एचपीवी वैक्सीन उपलब्ध कराई जाए, ताकि आने वाले वर्षों में सर्वाइकल कैंसर के मामलों में उल्लेखनीय कमी लाई जा सके।

भारत सरकार का यह कदम इसी वैश्विक रणनीति के अनुरूप माना जा रहा है। देशभर में 14 वर्ष की लड़कियों को यह वैक्सीन पूरी तरह मुफ्त दी जाएगी, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को भी लाभ मिल सके।

कौन-सी वैक्सीन दी जाएगी?

राष्ट्रीय कार्यक्रम के तहत Gardasil वैक्सीन का उपयोग किया जाएगा। यह वैक्सीन एचपीवी 16 और एचपीवी 18 जैसे उच्च जोखिम वाले वायरस स्ट्रेन से सुरक्षा प्रदान करती है, जो सर्वाइकल कैंसर के अधिकांश मामलों के लिए जिम्मेदार होते हैं। इसके अलावा यह एचपीवी 6 और एचपीवी 11 से भी बचाव करती है, जो अन्य संक्रमणों का कारण बन सकते हैं।

14 साल की उम्र क्यों चुनी गई?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि 9 से 14 वर्ष की आयु के बीच एचपीवी वैक्सीनेशन सबसे प्रभावी माना जाता है। इस उम्र में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली टीके के प्रति बेहतर प्रतिक्रिया देती है। साथ ही, इस चरण में टीकाकरण संक्रमण के संपर्क में आने से पहले सुरक्षा प्रदान करता है, जिससे भविष्य में बीमारी की संभावना कम हो जाती है।

किशोरावस्था में टीका लगने से लंबे समय तक सुरक्षा सुनिश्चित होती है। यही वजह है कि सरकार ने 14 वर्ष की लड़कियों को प्राथमिकता दी है।

जागरूकता भी उतनी ही जरूरी

विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ टीकाकरण ही नहीं, बल्कि जागरूकता अभियान भी बेहद जरूरी हैं। माता-पिता को इस कार्यक्रम की जानकारी होना आवश्यक है, ताकि वे अपनी बेटियों को समय पर टीका लगवा सकें।

सरकार का यह कदम महिलाओं के स्वास्थ्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। यदि यह अभियान व्यापक स्तर पर सफल होता है, तो आने वाले वर्षों में देश में सर्वाइकल कैंसर के मामलों में उल्लेखनीय कमी देखने को मिल सकती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *