गैस आपूर्ति पर सरकार का बड़ा फैसला: LPG, CNG और PNG को मिलेगी 100% गैस सप्लाई
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और आयातित गैस आपूर्ति में संभावित बाधा के बीच केंद्र सरकार ने देश में प्राकृतिक गैस के आवंटन को लेकर नई प्राथमिकता सूची जारी की है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि घरेलू स्तर पर उत्पादित गैस का इस्तेमाल सबसे पहले जरूरी क्षेत्रों में किया जाएगा ताकि आम लोगों और जरूरी उद्योगों पर इसका असर कम से कम पड़े।
सरकार द्वारा जारी गजट अधिसूचना के अनुसार अब एलपीजी, सीएनजी और पीएनजी जैसे जरूरी क्षेत्रों को गैस आवंटन में सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी जाएगी। इसका मतलब है कि इन क्षेत्रों की मांग को पहले पूरा किया जाएगा और उसके बाद अन्य क्षेत्रों को गैस उपलब्ध कराई जाएगी।
LPG, CNG और PNG को मिलेगी 100 प्रतिशत गैस आपूर्ति
सरकार के नए फैसले के तहत एलपीजी, सीएनजी और पीएनजी के लिए पिछले छह महीनों की औसत खपत के आधार पर 100 प्रतिशत गैस आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। इसका उद्देश्य यह है कि रसोई गैस, वाहन ईंधन और पाइपलाइन के जरिए घरों में पहुंचने वाली गैस की सप्लाई प्रभावित न हो।
एलपीजी का इस्तेमाल देश के करोड़ों घरों में खाना बनाने के लिए किया जाता है, जबकि सीएनजी का उपयोग बड़ी संख्या में वाहन ईंधन के रूप में होता है। वहीं पीएनजी के जरिए कई शहरों में घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को पाइपलाइन के माध्यम से गैस उपलब्ध कराई जाती है। इसलिए इन तीनों क्षेत्रों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का फैसला किया गया है।
उर्वरक उद्योग को दूसरी प्राथमिकता
नई व्यवस्था के अनुसार उर्वरक उद्योग को गैस आपूर्ति में दूसरी प्राथमिकता दी गई है। इस क्षेत्र को पिछले छह महीनों की औसत मांग का कम से कम 70 प्रतिशत गैस उपलब्ध कराई जाएगी।
उर्वरक उद्योग कृषि क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके जरिए किसानों को जरूरी खाद मिलती है। इसलिए सरकार ने इस क्षेत्र की जरूरतों को भी ध्यान में रखते हुए गैस आपूर्ति सुनिश्चित करने का फैसला किया है।
उद्योग और अन्य उपभोक्ताओं को तीसरी प्राथमिकता
सरकार की नई प्राथमिकता सूची में तीसरे स्थान पर चाय उद्योग, विनिर्माण क्षेत्र और अन्य औद्योगिक उपभोक्ताओं को रखा गया है। इन क्षेत्रों को परिचालन उपलब्धता के आधार पर पिछले छह महीनों की औसत खपत का लगभग 80 प्रतिशत गैस उपलब्ध कराई जाएगी।
इसके अलावा शहरी गैस वितरण कंपनियों द्वारा औद्योगिक और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को दी जाने वाली गैस आपूर्ति को प्राथमिकता सूची में चौथे स्थान पर रखा गया है।
भारत में गैस की बढ़ती मांग
भारत में प्राकृतिक गैस की मांग लगातार बढ़ रही है। देश में प्रतिदिन करीब 19.1 करोड़ मानक घन मीटर गैस की खपत होती है, लेकिन घरेलू उत्पादन इसका लगभग आधा ही पूरा कर पाता है। ऐसे में बड़ी मात्रा में गैस का आयात करना पड़ता है।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक आपूर्ति में अनिश्चितता को देखते हुए सरकार ने यह नई प्राथमिकता व्यवस्था लागू की है ताकि जरूरी क्षेत्रों में गैस की कमी न हो।
होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी चिंता
हाल ही में ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव के कारण पश्चिम एशिया क्षेत्र में स्थिति काफी संवेदनशील बनी हुई है। इसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक समुद्री तेल व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा और एलएनजी की करीब एक-तिहाई आपूर्ति होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरती है। यदि यहां से आपूर्ति प्रभावित होती है तो इसका असर कई देशों की ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है।
ऐसे हालात में सरकार का यह कदम देश में जरूरी गैस आपूर्ति को सुरक्षित रखने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

