24 Aug 2026, Mon

शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच सेंसेक्स 171 अंक फिसला, निफ्टी50 भी टूटा; जानिए अचानक क्यों बदला मार्केट का मूड?

नई दिल्ली: भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को कारोबार के दौरान भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में बाजार में खरीदारी का रुझान नजर आया, लेकिन कारोबारी सत्र आगे बढ़ने के साथ बिकवाली का दबाव बढ़ गया। इसके चलते सेंसेक्स और निफ्टी दोनों गिरावट के साथ बंद हुए। वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव और निवेशकों की सतर्कता का असर भी बाजार के सेंटीमेंट पर दिखाई दिया।

कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 171.72 अंक यानी करीब 0.22 फीसदी की गिरावट के साथ 77,369.11 अंक पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई निफ्टी50 32.95 अंक टूटकर 24,219.05 अंक पर पहुंच गया। दिनभर बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहा और निवेशकों ने कई प्रमुख शेयरों में मुनाफावसूली की।

1,970 शेयर बढ़े, 2,278 में आई गिरावट

सोमवार को बाजार में भले ही प्रमुख इंडेक्स लाल निशान में बंद हुए, लेकिन कुछ शेयरों में अच्छी खरीदारी भी देखने को मिली। आंकड़ों के मुताबिक करीब 1,970 शेयर बढ़त के साथ बंद हुए, जबकि 2,278 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। करीब 199 शेयरों में कोई खास बदलाव नहीं हुआ।

निफ्टी में एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस, बजाज फाइनेंस, बजाज फिनसर्व, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और अदानी पोर्ट्स प्रमुख गिरने वाले शेयरों में शामिल रहे। दूसरी ओर हिंडाल्को, जेएसडब्ल्यू स्टील, डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज, टाटा स्टील और एचसीएल टेक्नोलॉजीज में खरीदारी का रुझान देखने को मिला।

PSU बैंक शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव

सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो सोमवार को PSU बैंक शेयरों में सबसे ज्यादा कमजोरी देखने को मिली। PSU बैंक इंडेक्स करीब 1 फीसदी नीचे रहा। इसके अलावा प्राइवेट बैंक, मीडिया और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स इंडेक्स में भी गिरावट दर्ज की गई।

हालांकि, आईटी, एनर्जी, मेटल और रियल्टी सेक्टर ने बाजार को कुछ राहत दी। मेटल शेयरों में खरीदारी का असर साफ दिखाई दिया। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स करीब 0.13 फीसदी की बढ़त के साथ बंद हुआ, जबकि स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.26 फीसदी की गिरावट रही।

ईरान-अमेरिका तनाव से बढ़ी निवेशकों की चिंता

बाजार के कमजोर सेंटीमेंट की एक बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी अमेरिका और ईरान के बीच तनाव भी माना जा रहा है। निवेशकों को चिंता है कि अगर यह तनाव लंबे समय तक जारी रहता है तो कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है, जिसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और शेयर बाजारों पर पड़ सकता है।

ऐसे माहौल में निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपना रहे हैं। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक आने वाले कारोबारी सत्रों में वैश्विक संकेत, कच्चे तेल की कीमतें, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और भू-राजनीतिक घटनाक्रम बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

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