नई दिल्ली/तिरुवनंतपुरम: भारत के समुद्री व्यापार के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में केरल के विझिंजम इंटरनेशनल सीपोर्ट को विदेशों के साथ माल के आयात और निर्यात (EXIM) संचालन शुरू करने की अंतिम मंजूरी मिल गई है। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) ने बंदरगाह को 18 अगस्त 2026 से आधिकारिक रूप से एक्सपोर्ट-इंपोर्ट कार्गो ऑपरेशन शुरू करने की अनुमति दे दी है। अब तक यह बंदरगाह केवल अंतरराष्ट्रीय ट्रांसशिपमेंट हब के रूप में कार्य कर रहा था।
बंदरगाह का संचालन करने वाली विझिंजम इंटरनेशनल सीपोर्ट लिमिटेड (VISL) ने शनिवार को जारी बयान में बताया कि 24 जुलाई को जारी सीबीआईसी के आदेश के बाद बंदरगाह को निर्यात और आयात गतिविधियों के लिए हरी झंडी मिल गई है। इससे भारत के समुद्री व्यापार, लॉजिस्टिक्स और वैश्विक सप्लाई चेन में देश की भूमिका को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।
अब ट्रांसशिपमेंट के साथ होगा आयात-निर्यात
तिरुवनंतपुरम के पास स्थित विझिंजम बंदरगाह को अब तक केवल अंतरराष्ट्रीय ट्रांसशिपमेंट हब के तौर पर विकसित किया गया था, जहां विदेशी जहाजों से कंटेनरों का स्थानांतरण किया जाता था। लेकिन 18 अगस्त से यहां सीधे निर्यात और आयात का संचालन भी शुरू हो जाएगा। इससे भारतीय निर्यातकों और आयातकों को दक्षिण भारत में एक आधुनिक और रणनीतिक समुद्री केंद्र का लाभ मिलेगा।
कंटेनर फ्रेट स्टेशन नहीं होने से लागू रहेंगी शर्तें
सीबीआईसी ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल बंदरगाह से जुड़ा कोई कंटेनर फ्रेट स्टेशन (CFS) संचालित नहीं है। इसी कारण शुरुआती चरण में कुछ विशेष नियम लागू रहेंगे। जब तक सीएफएस पूरी तरह शुरू नहीं हो जाता, तब तक लेस-देन-कंटेनर लोड (LCL) कार्गो, खुले कार्गो तथा ऐसे कंटेनरों की अनुमति नहीं होगी जिनके लिए डी-स्टफिंग या विस्तृत कस्टम जांच की आवश्यकता होती है।
फैक्टरी-स्टफ्ड कंटेनरों को मिलेगी अनुमति
निर्यात के लिए केवल फैक्टरी-स्टफ्ड, सेल्फ-सील्ड या कस्टम्स-सील्ड फुल कंटेनर लोड (FCL) कंटेनरों को डायरेक्ट पोर्ट एंट्री (DPE) के माध्यम से प्रवेश दिया जाएगा। बंदरगाह परिसर में खुले तौर पर सामान भरने, कार्गो की पैकिंग या जांच जैसी गतिविधियों की अनुमति फिलहाल नहीं होगी। इससे संचालन को व्यवस्थित और सुरक्षित बनाए रखने में मदद मिलेगी।
आयात के लिए भी तय किए गए नियम
आयात के मामले में केवल उन फुल कंटेनर लोड (FCL) कंटेनरों को अनुमति मिलेगी जो डायरेक्ट पोर्ट डिलीवरी (DPD) के लिए पात्र होंगे। ऐसे कंटेनरों को बंदरगाह पर पहुंचने के 48 घंटे के भीतर सीधे आयातक के परिसर तक पहुंचाना अनिवार्य होगा। इससे कंटेनरों की तेज निकासी और बंदरगाह पर भीड़ कम करने में सहायता मिलेगी।
क्या होता है कंटेनर फ्रेट स्टेशन?
कंटेनर फ्रेट स्टेशन (CFS) बंदरगाह के निकट स्थित एक विशेष लॉजिस्टिक्स केंद्र होता है, जहां कंटेनरों की जांच, पैकिंग, डी-स्टफिंग, दोबारा लोडिंग और कस्टम से जुड़ी औपचारिकताएं पूरी की जाती हैं। सीएफएस के शुरू होने के बाद बंदरगाह पर विभिन्न प्रकार के कार्गो को संभालने की क्षमता और अधिक बढ़ जाएगी।
सड़क मार्ग से भी होगा कार्गो ट्रांसफर
सीबीआईसी ने यह भी अनुमति दी है कि डायरेक्ट पोर्ट डिलीवरी और डायरेक्ट पोर्ट एंट्री के अलावा विझिंजम बंदरगाह से इनलैंड कंटेनर डिपो (ICD), कंटेनर फ्रेट स्टेशन (CFS), स्पेशल इकोनॉमिक जोन (SEZ) और अन्य अधिसूचित कस्टम स्टेशनों तक सड़क मार्ग से कंटेनरों का परिवहन किया जा सकेगा। इससे देश के विभिन्न औद्योगिक और व्यापारिक क्षेत्रों तक सामान पहुंचाना आसान होगा।
भारत के समुद्री व्यापार को मिलेगा नया आयाम
विशेषज्ञों का मानना है कि विझिंजम इंटरनेशनल सीपोर्ट पर निर्यात-आयात संचालन शुरू होने से भारत की लॉजिस्टिक्स क्षमता मजबूत होगी और विदेशी बंदरगाहों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी। आधुनिक सुविधाओं से लैस यह बंदरगाह दक्षिण भारत के व्यापारियों और उद्योगों के लिए बड़ा लाभ साबित हो सकता है। साथ ही, इससे वैश्विक व्यापार में भारत की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति भी मजबूत होने की उम्मीद है।

