कानपुर: उत्तर प्रदेश का औद्योगिक शहर कानपुर अब एक बार फिर देश के बड़े कारोबारी नक्शे पर उभरने जा रहा है। गौतम अडानी की कंपनी Adani Ports and Special Economic Zone ने कानपुर में बड़ा निवेश करने की तैयारी शुरू कर दी है। इस मेगा प्रोजेक्ट के तहत शहर में आधुनिक मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क और वेयरहाउसिंग हब विकसित किया जाएगा, जिससे कानपुर की आर्थिक तस्वीर बदलने की उम्मीद जताई जा रही है। माना जा रहा है कि यह परियोजना आने वाले वर्षों में उत्तर भारत के व्यापार और सप्लाई चेन नेटवर्क के लिए गेम चेंजर साबित हो सकती है।
जानकारी के मुताबिक अडानी ग्रुप संकटग्रस्त Jaiprakash Associates Limited की सहायक कंपनी जेपी फर्टिलाइजर्स की 100 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने जा रहा है। यह डील करीब 1,500 करोड़ रुपये में पूरी होने की संभावना है। इस अधिग्रहण के बाद कानपुर स्थित 243 एकड़ जमीन पर अडानी समूह का नियंत्रण हो जाएगा। लंबे समय से बंद पड़ी इस जमीन को अब आधुनिक औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स हब के रूप में विकसित किया जाएगा।
सूत्रों के अनुसार, अडानी समूह यहां पारंपरिक खाद उत्पादन नहीं करेगा। इसके बजाय कंपनी की योजना अत्याधुनिक वेयरहाउस, कंटेनर यार्ड, ट्रांसपोर्ट नेटवर्क और मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने की है। इस प्रोजेक्ट से सड़क, रेल और माल परिवहन नेटवर्क को सीधा फायदा मिलेगा। खास बात यह है कि कानपुर की भौगोलिक स्थिति इसे उत्तर भारत का आदर्श लॉजिस्टिक्स केंद्र बनाती है। यहां से दिल्ली, लखनऊ, प्रयागराज, वाराणसी और बिहार जैसे बड़े बाजारों तक आसान कनेक्टिविटी उपलब्ध है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस परियोजना से कानपुर की अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार मिलेगी। शहर में हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे। ट्रांसपोर्ट, पैकेजिंग, वेयरहाउसिंग और सप्लाई चेन सेक्टर में बड़े स्तर पर रोजगार बढ़ने की उम्मीद है। साथ ही, छोटे और मध्यम उद्योगों को भी इसका फायदा मिलेगा क्योंकि माल ढुलाई और स्टोरेज की लागत कम हो सकती है।
अडानी समूह देशभर में अपने लॉजिस्टिक्स नेटवर्क का तेजी से विस्तार कर रहा है। कंपनी का लक्ष्य 2031 तक देश में मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स पार्कों की संख्या 16 तक पहुंचाने का है। कानपुर प्रोजेक्ट को इसी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। यह प्रोजेक्ट उत्तर भारत के औद्योगिक विकास में नई ऊर्जा भर सकता है।
बताया जा रहा है कि इस अधिग्रहण की दौड़ में कई बड़ी कंपनियां शामिल थीं। Vedanta Limited भी इस जमीन को हासिल करने की कोशिश में थी, लेकिन आखिरकार लेनदारों ने अडानी समूह के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल और अपीलेट ट्रिब्यूनल से मंजूरी मिलने के बाद अब अगले कुछ महीनों में डील पूरी होने की संभावना है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह परियोजना तय समय पर पूरी होती है तो कानपुर आने वाले समय में उत्तर भारत का सबसे बड़ा लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग हब बन सकता है। इससे न केवल शहर की आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी बल्कि उत्तर प्रदेश को भी निवेश और उद्योग के क्षेत्र में नई पहचान मिलेगी।

