24 Jun 2026, Wed

लखनऊ अग्निकांड: कानपुर के 2 दोस्त जिंदा जले, दादी की तेहरवीं में आना था संयम को, मां से छिपाई गई सूरजभान की मौत की खबर

लखनऊ में एक कोचिंग संस्थान में हुए भीषण अग्निकांड ने न केवल राजधानी को झकझोर दिया, बल्कि कानपुर के दो परिवारों की खुशियां भी हमेशा के लिए छीन लीं। इस दर्दनाक हादसे में कानपुर निवासी 28 वर्षीय संयम विज और 25 वर्षीय सूरजभान सिंह की जलकर मौत हो गई। दोनों एक ही एनीमेशन स्टूडियो में कार्यरत थे और लंबे समय से गहरे दोस्त भी थे। एक ही हादसे में दोनों की मौत की खबर जैसे ही कानपुर पहुंची, परिवारों में कोहराम मच गया और पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई।

दादी की तेरहवीं से पहले पहुंची बेटे की मौत की खबर

संयम विज कानपुर के गोविंद नगर क्षेत्र के ब्लॉक-11 के रहने वाले थे। परिवार पहले से ही दुख के दौर से गुजर रहा था। करीब दस दिन पहले संयम की दादी का निधन हुआ था और मंगलवार को उनका तेरहवीं संस्कार होना था। परिवार के लोग संयम के घर लौटने का इंतजार कर रहे थे, लेकिन इससे पहले ही उनके निधन की सूचना पहुंच गई।

परिजनों के अनुसार, संयम परिवार का सबसे जिम्मेदार सदस्य था। उनके पिता पुष्पराज विज का कई वर्ष पहले निधन हो चुका था, जिसके बाद परिवार की जिम्मेदारी काफी हद तक संयम पर आ गई थी। उन्होंने नौकरी कर परिवार को संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनका बड़ा भाई शुभम गुरुग्राम में नौकरी करता है। हादसे की सूचना मिलते ही वह अपनी पत्नी के साथ कानपुर के लिए रवाना हो गया।

परिवार ने देखे थे कई सपने

रिश्तेदारों का कहना है कि संयम बेहद मिलनसार और खुशमिजाज स्वभाव के थे। परिवार उनके भविष्य को लेकर काफी उत्साहित था और उनकी शादी की तैयारियां भी शुरू हो चुकी थीं। उनके लिए रिश्ते देखे जा रहे थे, लेकिन इस हादसे ने परिवार के सभी सपनों को एक झटके में तोड़ दिया।

सूरजभान की मौत से टूट गया परिवार

दूसरे मृतक सूरजभान सिंह कानपुर के बर्रा-सात इलाके के निवासी थे। उनके पिता का पहले ही निधन हो चुका था और परिवार में उनकी मां मीरा देवी तथा छोटा भाई सम्राट हैं। परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी सूरजभान पर ही थी। वह लखनऊ में नौकरी करते थे और हर सप्ताहांत परिवार से मिलने कानपुर आते थे।

रविवार को वह रोज की तरह काम पर लौटे थे, लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि यह उनकी आखिरी यात्रा साबित होगी। सूरजभान के भतीजे करन ने बताया कि हादसे के बाद पूरा परिवार सदमे में है। सबसे बड़ी चिंता उनकी मां को लेकर है, जिन्हें अभी तक बेटे की मौत की जानकारी नहीं दी गई है। परिजनों को डर है कि अचानक यह खबर मिलने से उनकी तबीयत बिगड़ सकती है।

हादसे के वक्त दफ्तर में मौजूद थे दोनों दोस्त

परिजनों के मुताबिक, हादसे के समय संयम और सूरजभान उसी कार्यालय में मौजूद थे, जहां अचानक आग लग गई। आग इतनी तेजी से फैली कि कर्मचारियों को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिल सका। कई लोग अंदर ही फंस गए और धुएं के कारण दम घुटने से उनकी मौत हो गई।

संयम के मामा सौरभ दुआ ने बताया कि इमारत में सेंसर आधारित प्रवेश और निकास व्यवस्था थी। आग लगने के दौरान तकनीकी प्रणाली प्रभावित हो गई, जिसके कारण गेट समय पर नहीं खुल सके। उनका कहना है कि यदि निकासी व्यवस्था सामान्य होती तो शायद कई लोगों की जान बचाई जा सकती थी।

शोक में डूबा पूरा इलाका

हादसे की खबर के बाद बड़ी संख्या में रिश्तेदार और परिचित लखनऊ के लिए रवाना हुए। सभी पोस्टमार्टम के बाद शवों के कानपुर पहुंचने का इंतजार कर रहे हैं। जिन घरों में कुछ दिन पहले तक पारिवारिक कार्यक्रमों की तैयारियां चल रही थीं, वहां अब अंतिम संस्कार की तैयारियां हो रही हैं।

इस दर्दनाक हादसे ने न सिर्फ दो परिवारों से उनके जवान बेटे छीन लिए, बल्कि पूरे कानपुर शहर को भी गहरे शोक में डुबो दिया है।

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