16 Sep 2026, Wed

रूस से कच्चा तेल खरीदने वालों पर 100% टैरिफ लगाने की तैयारी में अमेरिका, लाया जा रहा बिल; लिस्ट में भारत समेत कई देश शामिल

नई दिल्ली: रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर अमेरिका एक बार फिर बड़ा व्यापारिक दबाव बनाने की तैयारी में है। अमेरिकी संसद में एक संशोधित विधेयक पेश किया जा रहा है, जिसमें रूस के प्रमुख तेल खरीदार देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रावधान किया गया है। प्रस्तावित कानून में भारत और चीन समेत कई देशों को संभावित टैरिफ के दायरे में रखा गया है।

अमेरिकी संसद में पेश होगा संशोधित विधेयक

प्रस्तावित विधेयक में अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस के प्रमुख तेल खरीदार देशों पर भारी टैरिफ लगाने का अधिकार देने की बात कही गई है। संशोधित विधेयक में रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर माध्यमिक टैरिफ लगाने का प्रावधान किया गया है। इस पर अमेरिकी संसद में गुरुवार को मतदान होने की बात कही गई है।

अगर यह विधेयक कानून का रूप लेता है और इसमें दिए गए प्रावधान लागू किए जाते हैं, तो रूस से तेल खरीदने वाले देशों के साथ अमेरिका का व्यापार प्रभावित हो सकता है। हालांकि, टैरिफ लागू करने का वास्तविक फैसला और उसका दायरा आगे की प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

भारत और चीन समेत 10 देश संभावित सूची में

संशोधित विधेयक में भारत और चीन के अलावा तुर्की, अजरबैजान, हंगरी, स्लोवाकिया, संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, कजाकिस्तान और किर्गिज गणराज्य का भी नाम शामिल किए जाने का प्रस्ताव है। ये सभी देश रूस के साथ ऊर्जा या तेल कारोबार से जुड़े हुए हैं।

प्रस्तावित माध्यमिक टैरिफ का उद्देश्य उन देशों पर आर्थिक दबाव बढ़ाना है, जो रूस के साथ तेल कारोबार जारी रखते हैं। अमेरिका का तर्क है कि रूस की ऊर्जा आय उसके युद्ध संबंधी खर्चों को समर्थन देती है।

रूस-यूक्रेन युद्ध बना मुख्य वजह

रूस और यूक्रेन के बीच फरवरी 2022 से जारी युद्ध को लेकर अमेरिका लगातार रूस पर आर्थिक और व्यापारिक प्रतिबंधों का दबाव बढ़ाता रहा है। अमेरिकी नीति के मुताबिक रूस की ऊर्जा से होने वाली आय को सीमित करना उसके लिए आर्थिक दबाव बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।

अमेरिका का मानना है कि रूस को तेल निर्यात से मिलने वाली आय युद्ध जारी रखने की उसकी क्षमता को मजबूत करती है। इसी वजह से अब उन देशों पर भी दबाव बनाने की तैयारी है, जो रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदते हैं।

भारत के लिए क्या हो सकता है असर?

भारत लंबे समय से रूस से कच्चे तेल की खरीद करता रहा है। ऐसे में यदि प्रस्तावित 100 प्रतिशत टैरिफ व्यवस्था लागू होती है, तो इसका भारत-अमेरिका व्यापारिक संबंधों पर असर पड़ सकता है। हालांकि, अभी यह विधेयक प्रस्तावित चरण में है और इसके अंतिम स्वरूप तथा लागू होने की शर्तों को लेकर आगे की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।

टैरिफ लागू होने की स्थिति में भारतीय उत्पादों पर अमेरिकी बाजार में अतिरिक्त शुल्क का असर पड़ सकता है। इससे निर्यातकों की लागत और अमेरिका के साथ व्यापारिक समीकरण प्रभावित होने की संभावना पर चर्चा शुरू हो सकती है। फिलहाल अंतिम स्थिति अमेरिकी संसद में विधेयक की प्रक्रिया और उसके बाद होने वाले फैसलों पर निर्भर करेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *