नई दिल्ली: भारत के डिजिटल पेमेंट सिस्टम यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी UPI ने जून 2026 में एक बार फिर बड़े स्तर पर लेनदेन दर्ज किया है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के ताजा आंकड़ों के अनुसार, जून में UPI के माध्यम से कुल 22.72 अरब ट्रांजैक्शन किए गए। इन लेनदेन की कुल वैल्यू लगभग 28.92 लाख करोड़ रुपये रही। हालांकि, मई 2026 में बने रिकॉर्ड की तुलना में जून के मासिक आंकड़ों में मामूली गिरावट दर्ज की गई है।
मई 2026 में UPI के जरिए 23.20 अरब ट्रांजैक्शन हुए थे, जिनकी कुल वैल्यू 29.90 लाख करोड़ रुपये थी। इस आधार पर जून में ट्रांजैक्शन की संख्या में लगभग 2.1 प्रतिशत और कुल वैल्यू में करीब 3.3 प्रतिशत की मासिक गिरावट आई। मई में UPI ने मासिक ट्रांजैक्शन संख्या और वैल्यू, दोनों मामलों में नया रिकॉर्ड बनाया था।
रोजाना ट्रांजैक्शन का नया रिकॉर्ड
मासिक गिरावट के बावजूद जून में UPI के दैनिक उपयोग ने नया रिकॉर्ड बनाया। जून में 30 दिन होने के कारण रोजाना औसतन लगभग 75.72 करोड़ ट्रांजैक्शन किए गए। इसके मुकाबले 31 दिनों वाले मई में रोजाना औसतन करीब 74.84 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए थे।
इससे पता चलता है कि कुल मासिक ट्रांजैक्शन कम होने का एक प्रमुख कारण जून में मई से एक दिन कम होना भी है। दैनिक आधार पर देखा जाए तो जून में UPI का इस्तेमाल मई के मुकाबले अधिक रहा। जून में रोजाना औसतन लगभग 96,405 करोड़ रुपये का भुगतान UPI के माध्यम से किया गया।
सालाना आधार पर मजबूत बढ़ोतरी
जून 2025 में UPI ने लगभग 18.39 अरब ट्रांजैक्शन दर्ज किए थे, जिनकी वैल्यू करीब 24.03 लाख करोड़ रुपये थी। इसके मुकाबले जून 2026 में ट्रांजैक्शन संख्या लगभग 23.5 प्रतिशत और लेनदेन की कुल वैल्यू करीब 20.3 प्रतिशत बढ़ी है। ये आंकड़े दिखाते हैं कि छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े व्यवसायों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म तक UPI का उपयोग लगातार बढ़ रहा है।
NPCI के आंकड़ों के मुताबिक, जून 2026 में UPI से जुड़े लाइव बैंकों की संख्या भी बढ़कर 731 हो गई। मई में 720 और अप्रैल में 713 बैंक UPI प्लेटफॉर्म से जुड़े हुए थे। बैंकों की बढ़ती भागीदारी देश में डिजिटल भुगतान सेवाओं के लगातार विस्तार को दर्शाती है।
दस वर्षों में तेजी से बढ़ा UPI
UPI को अप्रैल 2016 में NPCI ने भारतीय रिजर्व बैंक की निगरानी में शुरू किया था। वित्त वर्ष 2016-17 में इसके माध्यम से केवल करीब दो करोड़ वार्षिक ट्रांजैक्शन हुए थे। वित्त वर्ष 2025-26 में यह संख्या बढ़कर 24,161 करोड़ से अधिक हो गई, जबकि लेनदेन की कुल वैल्यू लगभग 314 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई।
UPI की सफलता का प्रमुख कारण इसकी आसान प्रक्रिया, चौबीसों घंटे उपलब्धता और अलग-अलग बैंक खातों के बीच तुरंत भुगतान की सुविधा है। मोबाइल नंबर, UPI ID या QR कोड के माध्यम से उपयोगकर्ता कुछ ही सेकंड में पैसे भेज और प्राप्त कर सकते हैं।
जून के आंकड़ों में मासिक स्तर पर हल्की कमी जरूर आई है, लेकिन दैनिक और सालाना वृद्धि बताती है कि UPI भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण भुगतान व्यवस्था बनी हुई है।

