3 Nov 2026, Tue

राहुल गांधी की रैली से व्यापारियों को 12000 करोड़ रुपये का नुकसान, चेंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री का दावा

ढाई लाख दुकानें बंद रहने का दावा, जाम और ग्राहकों की कमी से कारोबार प्रभावित

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में रामलीला मैदान में आयोजित विपक्ष की महारैली के बाद व्यापारिक गतिविधियों पर पड़े असर को लेकर विवाद शुरू हो गया है। व्यापारियों के एक संगठन ने दावा किया है कि रैली के कारण दिल्ली के कई प्रमुख बाजारों में कारोबार प्रभावित हुआ और व्यापारियों को करीब 10 हजार से 12 हजार करोड़ रुपये तक का नुकसान उठाना पड़ा। संगठन के अनुसार, रैली के दौरान लगभग ढाई लाख दुकानें बंद रहीं या उनका कारोबार प्रभावित हुआ। हालांकि, नुकसान के इस अनुमान की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।

व्यापारियों का कहना है कि रैली के कारण मध्य दिल्ली के कई इलाकों में यातायात बाधित रहा। सड़कों पर जाम और बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही के चलते ग्राहक बाजारों तक नहीं पहुंच सके। इसका असर खास तौर पर उन कारोबारियों पर पड़ा, जिनके लिए त्योहारों का मौसम बिक्री के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होता है।

रामलीला मैदान के आसपास के बाजारों में कारोबार प्रभावित

चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) के चेयरमैन बृजेश गोयल के अनुसार, रैली के कारण रामलीला मैदान के आसपास स्थित करीब 25 बाजारों में व्यापारिक गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित हुईं। उन्होंने दावा किया कि कुछ प्रमुख बाजारों में लगभग 80 प्रतिशत दुकानें बंद रहीं।

व्यापारियों के मुताबिक, रैली के दौरान सड़क मार्गों पर यातायात की समस्या के कारण सामान खरीदने आने वाले ग्राहकों की संख्या में कमी आई। कई दुकानदारों को अपनी दुकानें बंद रखनी पड़ीं, जबकि कुछ स्थानों पर दुकानें खुली होने के बावजूद बिक्री सामान्य से काफी कम रही।

चांदनी चौक से करोल बाग तक असर का दावा

व्यापारिक संगठन के अनुसार, कश्मीरी गेट, चांदनी चौक, भागीरथ पैलेस, लाजपत मार्केट, करोल बाग, सदर बाजार, मीना बाजार, चावड़ी बाजार, पहाड़गंज और कनॉट प्लेस सहित कई प्रमुख कारोबारी क्षेत्रों में गतिविधियां प्रभावित हुईं।

इन बाजारों में कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स, किराना, सूखे मेवे और अन्य वस्तुओं का कारोबार होता है। व्यापारियों का कहना है कि त्योहारों के आसपास ग्राहकों की संख्या बढ़ने की उम्मीद रहती है, लेकिन रैली के कारण सामान्य खरीदारी प्रभावित हुई। इससे छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े व्यापारियों तक को आर्थिक नुकसान होने की आशंका है।

रैली टालने या स्थान बदलने की मांग की गई थी

व्यापारियों के संगठन का कहना है कि उन्होंने रैली से पहले आयोजकों को कई पत्र लिखकर कार्यक्रम की तारीख आगे बढ़ाने या आयोजन स्थल बदलने का अनुरोध किया था। उनका तर्क था कि त्योहारों के मौसम में बड़े राजनीतिक कार्यक्रम से बाजारों की आवाजाही और बिक्री पर असर पड़ सकता है।

व्यापारियों के मुताबिक, उनकी आशंकाएं रैली के दिन सही साबित हुईं। अब कुछ कारोबारी संगठनों ने इस मुद्दे पर नाराजगी जताते हुए नुकसान की भरपाई और भविष्य में ऐसे आयोजनों के दौरान बाजारों के हितों का ध्यान रखने की मांग की है।

राजनीतिक आयोजन और व्यापारिक हितों पर बहस

इस मामले ने राजनीतिक कार्यक्रमों और स्थानीय कारोबार के बीच संतुलन को लेकर बहस छेड़ दी है। बड़े आयोजनों के दौरान यातायात प्रबंधन, दुकानदारों की पहुंच और ग्राहकों की आवाजाही सुनिश्चित करना प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण चुनौती बन जाता है।

फिलहाल 12 हजार करोड़ रुपये के नुकसान और ढाई लाख दुकानों के प्रभावित होने के आंकड़े व्यापारिक संगठन के दावे हैं। नुकसान का वास्तविक स्तर निर्धारित करने के लिए स्वतंत्र आंकड़ों और बाजारवार कारोबार के आकलन की जरूरत होगी। इस घटना के बाद व्यापारियों की मांग है कि भविष्य में बड़े राजनीतिक आयोजनों की योजना बनाते समय बाजारों और आम लोगों की दैनिक गतिविधियों को भी प्राथमिकता दी जाए।

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