राष्ट्रपति से मिले राघव चड्ढा, पंजाब सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
नई दिल्ली: भारतीय राजनीति में एक बार फिर आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। राघव चड्ढा ने द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर पंजाब की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि राज्य में सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग किया जा रहा है और भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हुए सांसदों को निशाना बनाया जा रहा है।
राघव चड्ढा ने बताया कि उन्होंने तीन अन्य सांसदों के साथ राष्ट्रपति भवन पहुंचकर अपनी चिंताएं साझा कीं। मुलाकात के बाद उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक विस्तृत पोस्ट करते हुए कहा कि पंजाब की AAP सरकार लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ काम कर रही है। उनके अनुसार, जो सांसद पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए हैं, उन्हें प्रताड़ित करने के लिए प्रशासनिक संस्थाओं का इस्तेमाल किया जा रहा है।
चड्ढा ने अपने बयान में AAP पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यह पार्टी अब एक जिम्मेदार राजनीतिक संगठन की बजाय “नाराज और बदले की भावना रखने वाले पूर्व साथी” की तरह व्यवहार कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन नेताओं ने अपने संवैधानिक अधिकारों का प्रयोग करते हुए राजनीतिक निर्णय लिए, उन्हें अब सरकारी एजेंसियों के जरिए डराने और दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राघव चड्ढा ने यह भी दावा किया कि पंजाब सरकार विजिलेंस विभाग और पॉल्यूशन बोर्ड जैसी एजेंसियों का इस्तेमाल कर रही है। उनका कहना है कि इन एजेंसियों के जरिए पूर्व AAP सांसदों को निशाना बनाया जा रहा है और उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें खुद भी संभावित निशाने के रूप में देखा जा रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया पर भी एक सुनियोजित अभियान चलाया जा रहा है, जिसके तहत नेताओं को बदनाम करने और डराने की कोशिश की जा रही है। चड्ढा ने कहा कि यह सब राज्य सरकार के संसाधनों का गलत उपयोग कर किया जा रहा है, जो लोकतंत्र के लिए चिंताजनक है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात को लेकर चड्ढा ने बताया कि उन्होंने सभी तथ्यों को विस्तार से उनके सामने रखा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ने उन्हें आश्वासन दिया है कि संवैधानिक अधिकारों और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का पूरा सम्मान किया जाएगा। इस आश्वासन से उन्हें और उनके साथ आए सांसदों को कुछ हद तक राहत मिली है।
वहीं, इस पूरे मामले पर आम आदमी पार्टी की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी घमासान और तेज हो सकता है।
पंजाब की राजनीति पहले से ही कई विवादों के चलते सुर्खियों में रही है और अब यह नया आरोप-प्रत्यारोप राज्य के राजनीतिक माहौल को और गर्मा सकता है। ऐसे में सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आगे इस मामले में क्या कार्रवाई होती है और क्या यह विवाद किसी बड़े राजनीतिक टकराव का रूप लेता है।

