UP RERA का बड़ा फैसला: फ्लैट ट्रांसफर फीस पर लगी सीमा, होमबायर्स को बड़ी राहत
उत्तर प्रदेश में प्रॉपर्टी खरीदने और फ्लैट ट्रांसफर कराने वाले लोगों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority (UP RERA) ने बिल्डरों की मनमानी पर रोक लगाते हुए ट्रांसफर फीस की अधिकतम सीमा तय कर दी है। इस नए नियम के लागू होने से लाखों होमबायर्स को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है।
क्या है नया नियम?
UP RERA ने रेगुलेशन 47(c) लागू करते हुए स्पष्ट किया है कि अब बिल्डर फ्लैट ट्रांसफर के नाम पर मनमानी प्रोसेसिंग फीस नहीं वसूल सकेंगे। नए नियम के तहत, ट्रांसफर प्रक्रिया को भी सरल बनाया गया है। अब बिल्डर को नया एग्रीमेंट बनाने की जरूरत नहीं होगी, बल्कि मौजूदा एग्रीमेंट में ही बदलाव दर्ज करके ट्रांसफर पूरा किया जाएगा।
इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि खरीदारों को अतिरिक्त कानूनी और प्रशासनिक खर्चों से भी राहत मिलेगी।
परिवार के भीतर ट्रांसफर पर खास छूट
नए नियम के तहत अगर किसी फ्लैट मालिक की मृत्यु हो जाती है और संपत्ति परिवार के सदस्य के नाम ट्रांसफर होती है, तो बिल्डर अधिकतम ₹1000 तक ही प्रोसेसिंग फीस ले सकेगा।
यह नियम पति, पत्नी, नाबालिग बेटे और अविवाहित बेटी पर लागू होगा। इससे उन परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी, जिन्हें पहले ऐसे मामलों में भारी रकम चुकानी पड़ती थी।
तीसरे व्यक्ति को ट्रांसफर पर भी सीमा तय
अगर फ्लैट किसी तीसरे व्यक्ति के नाम ट्रांसफर किया जाता है, तब भी बिल्डर अब अधिकतम ₹25,000 तक ही फीस वसूल पाएगा। इससे पहले कई बिल्डर्स इस प्रक्रिया के नाम पर लाखों रुपये तक वसूलते थे, जिससे खरीदारों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता था।
UP RERA के इस कदम से अब इस तरह की मनमानी पर पूरी तरह रोक लग जाएगी।
किन दस्तावेजों की होगी जरूरत?
मृत्यु के बाद प्रॉपर्टी ट्रांसफर के लिए कुछ जरूरी दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे, जिनमें शामिल हैं:
- डेथ सर्टिफिकेट
- सक्सेशन सर्टिफिकेट
- अन्य वारिसों की NOC (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट)
इन दस्तावेजों के आधार पर ही बिल्डर रिकॉर्ड अपडेट करेगा और ट्रांसफर प्रक्रिया पूरी करेगा।
क्यों जरूरी था यह फैसला?
विशेषज्ञों के अनुसार, अब तक बिल्डर “प्रोसेसिंग फीस” के नाम पर प्रशासनिक खर्च का हवाला देकर मनमाने पैसे वसूलते थे। इससे होमबायर्स को आर्थिक और मानसिक दोनों तरह की परेशानी झेलनी पड़ती थी।
UP RERA का यह कदम रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता बढ़ाने और खरीदारों के हितों की रक्षा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
क्या होगा फायदा?
इस फैसले के बाद:
- फ्लैट ट्रांसफर की प्रक्रिया आसान और तेज होगी
- अनावश्यक खर्चों में कमी आएगी
- होमबायर्स का भरोसा रियल एस्टेट सेक्टर में बढ़ेगा
- बिल्डरों की मनमानी पर रोक लगेगी
निष्कर्ष
UP RERA द्वारा लिया गया यह फैसला प्रॉपर्टी सेक्टर में एक बड़ा सुधार माना जा रहा है। इससे न सिर्फ खरीदारों को राहत मिलेगी, बल्कि पूरे सिस्टम में पारदर्शिता और विश्वास भी मजबूत होगा। आने वाले समय में इस तरह के और कदम उठाए जाने की उम्मीद है, जिससे रियल एस्टेट सेक्टर और अधिक व्यवस्थित और उपभोक्ता-हितैषी बन सके।

