नई दिल्ली। मेटा (पूर्व फेसबुक) की एक महिला कर्मचारी की सोशल मीडिया पोस्ट इन दिनों तेजी से वायरल हो रही है। इस पोस्ट में महिला ने दावा किया कि कंपनी में लगातार छंटनी के डर और नौकरी की अनिश्चितता के कारण उसने बच्चे पैदा करने की योजना फिलहाल छोड़ दी है। पोस्ट सामने आने के बाद टेक इंडस्ट्री में जॉब सिक्योरिटी, मानसिक दबाव और निजी जीवन के बीच संतुलन को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।
यह पोस्ट गुमनाम पेशेवर नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म ब्लाइंड (Blind) पर लिखी गई थी, जहां सत्यापित कॉर्पोरेट कर्मचारी कार्यस्थल संस्कृति, वेतन, प्रमोशन और छंटनी जैसे मुद्दों पर अपनी राय साझा करते हैं। बाद में इस पोस्ट का स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर वायरल हो गया।
“मेटा में रहते हुए बच्चा नहीं कर सकती”
महिला कर्मचारी ने अपनी पोस्ट में लिखा कि पति के साथ लंबी बातचीत के बाद उसे यह महसूस हुआ कि मेटा में काम करते हुए परिवार बढ़ाने की योजना बनाना उसके लिए संभव नहीं है।
पोस्ट में उसने लिखा, “यह लिखना मेरे लिए अजीब है, लेकिन मुझे यह स्वीकार करना पड़ा कि मेटा में रहते हुए मुझे बच्चे पैदा करने की उम्मीद छोड़नी होगी।”
उसने कहा कि नौकरी की असुरक्षा इतनी अधिक है कि वह भविष्य की कोई योजना नहीं बना पा रही है।
मैटरनिटी लीव के बाद नौकरी की चिंता
महिला ने अपनी पोस्ट में सबसे बड़ी चिंता मैटरनिटी लीव के बाद नौकरी बचने की अनिश्चितता को बताया। उसके अनुसार, इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि वह अगले साल भी कंपनी में कार्यरत रहेगी।
उसने लिखा, “इस बात की बिल्कुल भी गारंटी नहीं है कि अगले साल तक मेरी नौकरी रहेगी। मैटरनिटी लीव से लौटने तक तो और भी कम भरोसा है।”
महिला ने दावा किया कि कंपनी का मौजूदा माहौल, लगातार बदलती कार्यशैली और आर्थिक अनिश्चितता ने फैमिली प्लानिंग को लगभग असंभव बना दिया है।
“जैविक घड़ी तेजी से चल रही है”
पोस्ट के अंत में महिला ने भावनात्मक शब्दों में लिखा कि उसकी “बायोलॉजिकल क्लॉक” लगातार आगे बढ़ रही है और उसे डर है कि कहीं नौकरी की अस्थिरता के कारण वह भविष्य में मां बनने का अवसर ही न खो दे।
उसने लिखा, “क्या होगा अगर इस नौकरी की वजह से मैं कभी बच्चे पैदा ही न कर पाऊं?”
इस बयान ने सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोगों का ध्यान आकर्षित किया।
मेटा में छंटनी का असर
गौरतलब है कि मेटा ने पिछले कुछ वर्षों में कई चरणों में बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की छंटनी की है। हाल के दौर में कंपनी ने परफॉर्मेंस-आधारित मूल्यांकन के तहत लगभग 3,600 कर्मचारियों को नौकरी से निकाला था।
विश्लेषकों का मानना है कि लगातार छंटनी और प्रदर्शन आधारित दबाव ने कर्मचारियों के मनोबल और मानसिक स्वास्थ्य पर असर डाला है। खासकर युवा पेशेवरों के बीच नौकरी की अनिश्चितता एक बड़ा मुद्दा बनकर उभरी है।
सोशल मीडिया पर मिली मिली-जुली प्रतिक्रियाएं
वायरल पोस्ट पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ यूजर्स ने महिला की चिंता को पूरी तरह जायज बताया और कहा कि आज के कॉर्पोरेट माहौल में कई कर्मचारी इसी तरह की असुरक्षा महसूस करते हैं।
वहीं कुछ लोगों ने सलाह दी कि व्यक्तिगत जीवन के बड़े फैसलों को केवल एक नौकरी के आधार पर नहीं टालना चाहिए।
हालांकि यह पोस्ट एक गुमनाम कर्मचारी द्वारा लिखी गई है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इसने टेक इंडस्ट्री में काम और निजी जीवन के संतुलन, महिलाओं की करियर चुनौतियों और नौकरी की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर गंभीर चर्चा जरूर शुरू कर दी है।

