ढाका: बांग्लादेश में गुरुवार को हुए राष्ट्रपति चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के वरिष्ठ नेता मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने जीत दर्ज की है। वह देश के 23वें राष्ट्रपति चुने गए हैं। यह चुनाव इसलिए भी ऐतिहासिक रहा क्योंकि बांग्लादेश में करीब 35 साल बाद राष्ट्रपति पद के लिए मुकाबला हुआ। आलमगीर ने विपक्षी उम्मीदवार और रिटायर्ड कर्नल ओली अहमद को हराया।
255 वोट मिले, प्रतिद्वंद्वी को 88
राष्ट्रपति चुनाव में कुल 349 सांसदों को मतदान का अधिकार था। चुनाव में मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर को 255 वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी ओली अहमद को 88 वोट हासिल हुए। मुख्य निर्वाचन आयुक्त एएमएम नासिर उद्दीन ने परिणाम की घोषणा की। इस तरह आलमगीर ने स्पष्ट बहुमत के साथ राष्ट्रपति पद पर कब्जा जमाया।
यह बांग्लादेश के इतिहास में 35 वर्षों बाद पहला ऐसा राष्ट्रपति चुनाव था, जिसमें दो उम्मीदवारों के बीच मुकाबला हुआ। इससे पहले 1991 में राष्ट्रपति चुनाव में मुकाबला हुआ था। इसके बाद कई बार राष्ट्रपति का चुनाव निर्विरोध हुआ।
कितनी है मिर्जा फखरुल की उम्र?
मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर का जन्म 26 जनवरी 1948 को बांग्लादेश के ठाकुरगांव जिले में हुआ था। उनकी उम्र 78 साल है। उन्होंने ढाका विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र की पढ़ाई की और बाद में शिक्षक के रूप में अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद वह स्थानीय राजनीति में आए और धीरे-धीरे बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी में अपनी मजबूत जगह बनाई।
BNP के लंबे समय से प्रमुख नेताओं में रहे आलमगीर
मिर्जा फखरुल आलमगीर बांग्लादेश की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय हैं। वह 2016 से BNP के महासचिव के रूप में पार्टी की कमान संभाल रहे थे। शेख हसीना के शासनकाल के दौरान वह विपक्ष के प्रमुख नेताओं में शामिल रहे और कई बार उनकी गिरफ्तारी भी हुई।
2026 के आम चुनाव में BNP की सत्ता में वापसी के बाद आलमगीर को राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार बनाया गया। प्रधानमंत्री तारिक रहमान के नेतृत्व वाली BNP और उसके सहयोगी दलों के पास संसद में दो-तिहाई बहुमत है। यही वजह रही कि चुनाव से पहले ही आलमगीर की जीत की संभावना काफी मजबूत मानी जा रही थी।
शेख हसीना के दौर के बाद बड़ा राजनीतिक बदलाव
बांग्लादेश में 2024 में शेख हसीना की सरकार के सत्ता से बाहर होने के बाद देश की राजनीति में बड़ा बदलाव आया। इसके बाद BNP ने 2026 के आम चुनाव में सत्ता में वापसी की। अब पार्टी के वरिष्ठ नेता मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर का राष्ट्रपति बनना इस राजनीतिक बदलाव की अगली महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है।
बांग्लादेश में राष्ट्रपति का पद मुख्य रूप से संवैधानिक और औपचारिक है, जबकि वास्तविक कार्यकारी शक्तियां प्रधानमंत्री और मंत्रिमंडल के पास रहती हैं। हालांकि राष्ट्रपति देश के प्रमुख और सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर होते हैं।
21 अगस्त को लेंगे राष्ट्रपति पद की शपथ
चुनाव में जीत के बाद मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर के 21 अगस्त की शाम बंगभवन में राष्ट्रपति पद की शपथ लेने की तैयारी है। शपथ ग्रहण समारोह शाम करीब 7:30 बजे आयोजित किए जाने की जानकारी सामने आई है।
इस तरह लंबे राजनीतिक सफर के बाद 78 वर्षीय मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर अब बांग्लादेश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर पहुंच गए हैं। उनका राष्ट्रपति बनना BNP की सत्ता में वापसी के बाद देश की राजनीति में एक और बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

