14 Mar 2026, Sat

मिडिल ईस्ट की जंग ने डुबोया मुंबई का फ्रूट मार्केट! कौड़ियों के दाम बिक रहे फल, व्यापारियों के निकले आंसू

मिडिल ईस्ट युद्ध का असर भारत में: वाशी की APMC Fruit Market Vashi में फलों के दाम गिरे, तरबूज-पपीता कौड़ियों के भाव

मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध का असर अब भारत के बाजारों में भी साफ दिखाई देने लगा है। खासतौर पर मुंबई के पास स्थित नवी मुंबई की एशिया की सबसे बड़ी फल मंडियों में से एक APMC Fruit Market Vashi इन दिनों गंभीर संकट से गुजर रही है। खाड़ी देशों को होने वाला फलों का निर्यात लगभग ठप पड़ जाने से बाजार में फलों की भारी भरमार हो गई है और कीमतों में अचानक भारी गिरावट दर्ज की गई है। इस स्थिति का सीधा नुकसान किसानों और फल व्यापारियों दोनों को झेलना पड़ रहा है।

निर्यात रुकने से मंडी में बढ़ी सप्लाई

फल व्यापारियों के अनुसार, हर साल रमजान के दौरान खाड़ी देशों में भारतीय फलों की मांग काफी बढ़ जाती है। खासतौर पर तरबूज, पपीता, खरबूजा और अंगूर जैसे फलों का बड़ा हिस्सा विदेशों में निर्यात किया जाता है। लेकिन मौजूदा युद्ध और समुद्री मार्गों पर बढ़े जोखिम के कारण जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है।

नतीजतन खाड़ी देशों को भेजे जाने वाले फल अब स्थानीय बाजारों में ही रहे हैं। इससे मंडी में सप्लाई अचानक बहुत ज्यादा बढ़ गई है। मांग कम होने और सप्लाई बढ़ने के कारण फलों के दाम तेजी से गिर गए हैं।

फलों की कीमतों में भारी गिरावट

वाशी की एपीएमसी मंडी में इन दिनों कई फलों के दाम आधे से भी कम हो गए हैं।

  • तरबूज, जो पहले थोक बाजार में 30 से 35 रुपये प्रति किलो बिकता था, अब केवल 8 से 10 रुपये प्रति किलो रह गया है।

  • पपीता, जिसकी कीमत पहले 30 से 35 रुपये प्रति किलो थी, अब घटकर 20 से 25 रुपये प्रति किलो तक गई है।

  • अंगूर के 9 किलो के कैरेट की कीमत भी पहले 1500 से 1600 रुपये हुआ करती थी, लेकिन अब यह गिरकर लगभग 500 से 600 रुपये तक पहुंच गई है।

इतनी बड़ी गिरावट से व्यापारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। कई व्यापारियों का कहना है कि उन्हें लागत तक निकालना मुश्किल हो रहा है।

सड़ने लगे फल, बढ़ी व्यापारियों की परेशानी

मंडी में रोजाना बड़ी मात्रा में फल पहुंच रहे हैं। पहले यहां औसतन लगभग 2000 टन फल रोजाना आते थे, लेकिन अब निर्यात रुकने के कारण इससे भी ज्यादा माल मंडी में आने लगा है।

मांग कम होने के कारण कई बार फल बिक नहीं पाते और मंडी में ही खराब होने लगते हैं। कई जगहों पर सड़े हुए फलों के ढेर भी दिखाई दे रहे हैं। मजबूरी में व्यापारियों को इन्हें फेंकना पड़ रहा है, जिससे आर्थिक नुकसान और बढ़ गया है।

किसानों पर भी पड़ा असर

इस स्थिति का असर किसानों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। किसानों का कहना है कि फलों की कीमतें गिरने से उनकी मेहनत का सही दाम नहीं मिल पा रहा है। परिवहन और उत्पादन लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है।

सरकार से राहत की मांग

फल व्यापारियों और किसानों ने सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। उनका कहना है कि निर्यात के लिए वैकल्पिक रास्ते तलाशे जाएं या नए बाजारों की व्यवस्था की जाए। इसके अलावा राहत पैकेज देने की भी मांग की जा रही है ताकि किसानों और व्यापारियों को कुछ आर्थिक राहत मिल सके।

अगर जल्द कोई समाधान नहीं निकाला गया तो आने वाले दिनों में यह संकट और गहरा सकता है और इसका असर देश के फल व्यापार पर व्यापक रूप से पड़ सकता है।

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