मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में लोकायुक्त पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के ठिकानों पर छापेमारी की है। इस कार्रवाई में लगभग 11 करोड़ रुपये से अधिक की चल-अचल संपत्ति का खुलासा हुआ है, जिससे प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है।
यह कार्रवाई Lokayukt Police Madhya Pradesh की टीम द्वारा की गई, जिसमें विभाग के संयुक्त संचालक लक्ष्मीनारायण कंडवाल के इंदौर स्थित घर और अन्य परिसरों की तलाशी ली गई।
कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी
लोकायुक्त टीम ने एक बहुमंजिला मकान, जिम, डिपार्टमेंटल स्टोर और अन्य संपत्तियों पर एक साथ छापेमारी की। जांच के दौरान भारी मात्रा में संपत्ति और निवेश से जुड़े दस्तावेज भी बरामद किए गए।
अधिकारियों के अनुसार, अब तक की जांच में कुल ज्ञात वैध आय लगभग 2.80 करोड़ रुपये आंकी गई है, जिसमें 30 वर्षों की सेवा के दौरान मिला वेतन और कृषि आय शामिल है। लेकिन इसके मुकाबले लगभग 10.83 करोड़ रुपये की संपत्ति का पता चला है, जो उनकी आय से कई गुना अधिक बताई जा रही है।
करोड़ों की संपत्ति और निवेश का खुलासा
जांच में सामने आया है कि अधिकारी और उनके परिवार ने जमीन खरीद और भवन निर्माण पर करीब 9.76 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। इसके अलावा घर से मिले सामान की कीमत लगभग 38.49 लाख रुपये आंकी गई है।
बैंक लॉकर से सोने-चांदी के आभूषण भी बरामद हुए हैं, जिनकी कीमत लगभग 24.76 लाख रुपये बताई गई है। वहीं डिपार्टमेंटल स्टोर में रखे सामान का मूल्य 35.73 लाख रुपये और जिम उपकरणों की कीमत करीब 2.71 लाख रुपये बताई गई है।
घर से मिले अतिरिक्त आभूषणों का मूल्य भी लगभग 4.89 लाख रुपये आंका गया है।
पूछताछ में पत्नी की सिलाई-बुनाई का दावा
जांच के दौरान पूछताछ में अधिकारी ने दावा किया कि उनकी पत्नी सिलाई-बुनाई करके परिवार की आय में योगदान देती हैं। लोकायुक्त टीम ने कहा है कि इस दावे की पुष्टि के लिए आयकर रिटर्न की जांच की जाएगी।
परिवार के व्यवसाय और आय के स्रोत
जानकारी के अनुसार, डिपार्टमेंटल स्टोर का संचालन उनके दोनों बेटे करते हैं, जबकि जिम से लगभग 1.25 लाख रुपये मासिक किराया मिलने की बात सामने आई है। लोकायुक्त टीम इन सभी आय स्रोतों की भी जांच कर रही है।
बैंक खातों पर रोक और आगे की जांच
जांच के दौरान संबंधित अधिकारी और उनके परिवार के बैंक खातों से लेन-देन पर रोक लगा दी गई है। बैंकों से विस्तृत रिकॉर्ड मंगाया जा रहा है ताकि संपत्ति का पूरा आकलन किया जा सके।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज
अधिकारियों ने बताया कि मामले में भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम 2018 के तहत केस दर्ज किया गया है। Prevention of Corruption Act 2018 (India amendment) के तहत आगे की विस्तृत जांच जारी है।
निष्कर्ष
इंदौर की यह कार्रवाई एक बार फिर सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति के मामलों को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। लोकायुक्त की जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

