महिला आरक्षण विधेयक लोकसभा में पास न होने पर सियासी घमासान, पीएम मोदी का विपक्ष पर तीखा हमला
नई दिल्ली: संसद के बजट सत्र के दौरान बहुप्रतीक्षित महिला आरक्षण विधेयक लोकसभा में पारित नहीं हो सका, जिसके बाद देश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। नरेंद्र मोदी ने कैबिनेट बैठक में इस मुद्दे पर विपक्षी दलों को आड़े हाथों लेते हुए कड़ी नाराजगी जाहिर की और कहा कि इस फैसले का परिणाम उन्हें भुगतना पड़ेगा।
दरअसल, ‘संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026’ का उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देना था। यह विधेयक लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक बहस का केंद्र रहा है। लेकिन शुक्रवार को लोकसभा में हुई वोटिंग के दौरान यह बिल आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल करने में विफल रहा। आंकड़ों के मुताबिक, विधेयक के पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि 230 सांसदों ने इसके खिलाफ मतदान किया।
वोटिंग से पहले और बाद में संसद में जोरदार बहस देखने को मिली। सत्ता पक्ष ने इसे महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया, वहीं विपक्ष ने बिल के कई प्रावधानों पर सवाल उठाए। विपक्षी दलों का कहना था कि बिल में सामाजिक और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व से जुड़े कई मुद्दों को नजरअंदाज किया गया है।
विधेयक के पास न होने के बाद शनिवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी। सूत्रों के अनुसार, उन्होंने कहा कि विपक्ष ने देश की महिलाओं को निराश किया है और यह एक “बहुत बड़ी गलती” है। पीएम ने यह भी कहा कि देश की महिलाएं इस फैसले को नहीं भूलेंगी और आने वाले समय में विपक्ष को इसका राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में यह भी जोर दिया कि इस मुद्दे को देश के हर कोने तक पहुंचाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “यह संदेश हर गांव, हर परिवार तक जाना चाहिए कि किसने महिलाओं के अधिकारों का समर्थन किया और किसने इसका विरोध किया।” उनके इस बयान को आगामी चुनावों के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इससे पहले, लोकसभा में वोटिंग के दौरान पीएम मोदी ने सभी सांसदों से भावुक अपील की थी। उन्होंने कहा था कि वे अपने घर की महिलाओं—मां, बहन, बेटी और पत्नी—को याद करते हुए अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनें और महिलाओं के हित में निर्णय लें। हालांकि, इस अपील के बावजूद विपक्ष ने बिल का विरोध जारी रखा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महिला आरक्षण का मुद्दा आने वाले चुनावों में बड़ा चुनावी मुद्दा बन सकता है। एक तरफ जहां सत्तारूढ़ दल इसे महिलाओं के सशक्तिकरण के प्रतीक के रूप में पेश कर रहा है, वहीं विपक्ष इसे अधूरा और असंतुलित कानून बताकर अपने पक्ष को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।
कुल मिलाकर, महिला आरक्षण विधेयक का लोकसभा में पास न होना न केवल एक महत्वपूर्ण विधायी घटना है, बल्कि इसने देश की राजनीति को भी नई दिशा दे दी है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और अधिक गरमाने की संभावना है, खासकर तब जब चुनावी माहौल तेज होगा।

