1965 की ‘भूत बंगला’ ने रखी थी हॉरर-कॉमेडी की नींव, आज भी कायम है इसका जादू
आज जब भूत बंगला एक बार फिर सिनेमाघरों में दर्शकों का मनोरंजन कर रही है, तो इस नाम से जुड़ी एक पुरानी याद भी ताजा हो गई है। बहुत कम लोग जानते हैं कि बॉलीवुड में ‘भूत बंगला’ का इतिहास 60 साल पुराना है और इसकी शुरुआत दिग्गज अभिनेता-निर्देशक महमूद ने की थी।
साल 1965 में रिलीज हुई भूत बंगला न सिर्फ अपने समय की हिट फिल्म थी, बल्कि इसे हिंदी सिनेमा में हॉरर-कॉमेडी जॉनर की शुरुआत करने का श्रेय भी दिया जाता है। उस दौर में जहां हॉरर और कॉमेडी को अलग-अलग शैलियों में देखा जाता था, वहीं महमूद ने इन दोनों का अनोखा मेल पेश कर एक नई दिशा दी।
फिल्म की कहानी एक रहस्यमयी बंगले के इर्द-गिर्द घूमती है, जहां अजीबोगरीब घटनाएं घटती हैं। इस बंगले के मालिक कुंदनलाल की रहस्यमयी मौत हो जाती है और उनका पूरा परिवार अचानक गायब हो जाता है। कहानी इसके बाद कई साल आगे बढ़ती है, जब उनके रिश्तेदार इस बंगले में रहने आते हैं और एक के बाद एक रहस्यमयी घटनाओं का सिलसिला शुरू हो जाता है।
फिल्म में महमूद के साथ तनुजा समर्थ और नासिर हुसैन मुख्य भूमिकाओं में नजर आए थे। कहानी में सस्पेंस, डर और हास्य का ऐसा संतुलन देखने को मिला, जिसने दर्शकों को बांधे रखा। खास बात यह थी कि फिल्म डराने के साथ-साथ दर्शकों को हंसाने में भी पूरी तरह सफल रही।
उस दौर में फिल्म की कमाई के सटीक आंकड़े भले उपलब्ध न हों, लेकिन इसे बॉक्स ऑफिस पर सफल माना गया था। दर्शकों ने इसे खूब पसंद किया और यही वजह रही कि यह फिल्म आज भी एक क्लासिक के रूप में याद की जाती है।
‘भूत बंगला’ का प्रभाव बाद की कई फिल्मों में भी देखने को मिला। खासतौर पर भूल भुलैया जैसी फिल्मों ने इस जॉनर को आगे बढ़ाया और नए दौर के दर्शकों तक पहुंचाया। आज अक्षय कुमार और निर्देशक प्रियदर्शन की नई फिल्म में भी उसी तरह का हॉरर और कॉमेडी का मिश्रण देखने को मिल रहा है, जो दर्शकों को पुराने दौर की याद दिला रहा है।
कुल मिलाकर, 1965 की ‘भूत बंगला’ सिर्फ एक फिल्म नहीं थी, बल्कि एक ऐसे जॉनर की शुरुआत थी जिसने हिंदी सिनेमा को नई पहचान दी। आज भी जब इस नाम से नई फिल्म रिलीज होती है, तो यह उस विरासत को आगे बढ़ाने का काम करती है, जिसकी नींव दशकों पहले रखी गई थी।

