4 Nov 2026, Wed

भारतीय नौसेना के दो अधिकारियों का होगा कोर्ट मार्शल, नेवी ने शुरू की प्रक्रिया, क्यों हुई कार्रवाई?

मुंबई: भारतीय नौसेना के युद्धपोत INS ब्रह्मपुत्र के पलटने की घटना के करीब दो साल बाद इस मामले में बड़ी कार्रवाई शुरू की गई है। नौसेना ने हादसे के सिलसिले में दो अधिकारियों के खिलाफ कोर्ट मार्शल की प्रक्रिया शुरू कर दी है। दोनों अधिकारियों पर ड्यूटी के दौरान कथित लापरवाही बरतने के आरोप हैं। इनमें युद्धपोत के तत्कालीन कमांडिंग ऑफिसर यानी कैप्टन और ऑफिसर ऑफ द डे के रूप में तैनात लेफ्टिनेंट कमांडर शामिल हैं। कैप्टन पर युद्धपोत को खतरे में डालने का अतिरिक्त आरोप भी लगाया गया है।

यह मामला जुलाई 2024 में मुंबई के नेवल डॉकयार्ड में मरम्मत के दौरान INS ब्रह्मपुत्र में आग लगने और उसके बाद जहाज के एक तरफ पलट जाने से जुड़ा है। इस हादसे में एक नौसैनिक की जान चली गई थी।

जुलाई 2024 में कैसे हुआ था हादसा?

21 जुलाई 2024 को मुंबई के नेवल डॉकयार्ड में मरम्मत के दौरान INS ब्रह्मपुत्र में आग लग गई थी। आग बुझाने के लिए बड़े पैमाने पर प्रयास किए गए और जहाज में काफी मात्रा में पानी डाला गया। इसके बाद युद्धपोत का संतुलन बिगड़ गया और वह पोर्ट साइड यानी बंदरगाह की ओर झुकते हुए पलट गया।

इस घटना के बाद जहाज को सीधा करने की कोशिश की गई, लेकिन शुरुआती प्रयास सफल नहीं हो सके। हादसे के दौरान नौसैनिकों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए बचाव अभियान चलाया गया। कुछ नौसैनिक गैंगवे के रास्ते बाहर निकले, जबकि कुछ को जान बचाने के लिए समुद्र में कूदना पड़ा।

एक नौसैनिक की हुई थी मौत

INS ब्रह्मपुत्र हादसे में लीडिंग सीमैन सितेंद्र सिंह की मौत हो गई थी। घटना के बाद उनकी तलाश के लिए नौसेना ने अभियान चलाया और उनका शव बरामद किया गया।

हादसे की गंभीरता को देखते हुए नौसेना ने पूरे मामले की जांच के आदेश दिए थे। जांच में जहाज पर सुरक्षा व्यवस्था, आग बुझाने की प्रक्रिया और ड्यूटी के दौरान अधिकारियों की जिम्मेदारियों जैसे पहलुओं की पड़ताल की गई।

दो अधिकारियों पर क्या हैं आरोप?

अब इस मामले में कमांडिंग ऑफिसर और ऑफिसर ऑफ द डे के खिलाफ कोर्ट मार्शल की प्रक्रिया शुरू की गई है। दोनों पर ड्यूटी के दौरान कथित लापरवाही के आरोप हैं। इसके अलावा कैप्टन पर ‘हैजार्डिंग ए नेवल वेसल’ यानी नौसैनिक युद्धपोत को खतरे में डालने का अतिरिक्त आरोप लगाया गया है।

कोर्ट मार्शल सैन्य कर्मियों के खिलाफ आरोपों की सुनवाई करने वाली औपचारिक प्रक्रिया है। इस प्रक्रिया के दौरान आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच की जाती है। आरोप लगाए जाने का अर्थ यह नहीं है कि संबंधित अधिकारियों को दोषी ठहरा दिया गया है। अंतिम निर्णय सैन्य न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।

INS ब्रह्मपुत्र को दोबारा तैयार करने में लगे कई महीने

हादसे के बाद युद्धपोत को दोबारा सीधा करने के लिए नौसेना ने कई महीनों तक सल्वेज ऑपरेशन चलाया। जहाज को सीधा किए जाने के बाद उसकी मरम्मत और बहाली का काम शुरू किया गया।

INS ब्रह्मपुत्र भारतीय नौसेना के महत्वपूर्ण युद्धपोतों में शामिल है। हादसे के कारण इसकी परिचालन स्थिति प्रभावित हुई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जहाज को दोबारा पूरी तरह परिचालन के लिए तैयार करने की प्रक्रिया जारी है और इसके 2027 तक समुद्री संचालन के लिए तैयार होने की उम्मीद जताई गई है।

नौसेना की कार्रवाई पर नजर

करीब दो साल बाद शुरू हुई कोर्ट मार्शल की प्रक्रिया इस हादसे की जवाबदेही तय करने की दिशा में अहम कदम है। अब यह देखना होगा कि सुनवाई के दौरान क्या तथ्य सामने आते हैं और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर क्या फैसला होता है।


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